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‘चंगी सेहत-चंगी सोच’ अभियान के तहत लगाया मेडिकल कैंप

खरड़| पंजाब सरकार द्वारा किए तंदरूस्त पंजाब ‘चंगी सेहत-चंगी सोच’ अभियान के तहत सिविल सर्जन के दिशानिर्देशों पर...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 07, 2018, 02:00 AM IST

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    खरड़| पंजाब सरकार द्वारा किए तंदरूस्त पंजाब ‘चंगी सेहत-चंगी सोच’ अभियान के तहत सिविल सर्जन के दिशानिर्देशों पर पीएचसी घडुआं की एसएमओ डॉ. कुलजीत कौर की अध्यक्षता में गांव बलौंगी के गुरुद्वार साहिब में चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। जिस कैंप में डॉक्टरों द्वारा भारी संख्या में लोगों की मेडिकल जांच की गई व उन्हें दवाएं भी बांटी गई। इस मौके पर बलौंगी काॅलोनी की सरपंच भिंदरजीत कौर, डॉ. परमिंदर सिंह, डॉ. जसलीन कौर, डाॅ. रचित्रा, डॉ. कुमुद, अजय कुमार, जगजीवन कौर, अमरजीत कौर, करनैल सिंह, रंजीत सिंह, इंदरजीत सिंह, शाम रानी व अन्य मौजूद थे।

    कार्यक्रम की कवरेज के लिए 8195820001 पर वॉट्सएप करें। manoj.joshi@dbcorp.in पर मेल करें।

    प्रभ आसरा ने तमिलनाडु की मैरी को मिलाया उसके परिवार से

    सिटी रिपोर्टर | कुराली

    शहर के अंतर्गत आते गांव पडियाला के प्रभ आसरा में 4 वर्ष पहले दाखिल हुई एक मैरी नामक महिला को तमिलनाडु में बनयन संस्था की मदद के साथ उसके पारिवारिक मेंबरों से मिलाया गया। इस संबंधी जानकारी देते हुए संस्था के मुख्य प्रबंधक भाई शमशेर सिंह पडियाला और बीबी रजिन्द्र कौर ने बताया कि लगभग 44 वर्षीय मैरी 4 वर्ष पहले अंबाला में लावारिस स्थिति में मिली थी। जिसके बाद वहा के समाज सेवी लोगों ने पुलिस की मदद से उसको संस्था में दाखिल करवाया था। उन्होंने बताया कि मैरी दिमागी तौर पर ठीक नहीं थी।

    संस्था द्वारा मैरी की संभाल और उपचार करवाया गया। इसी दौरान उसने अपना पता तमिलनाडु बताया था। जिसके बाद लगातार संस्था द्वारा मिशन मिलाप मुहिम के तहत उसके परिवार के बारे में पता लगाया गया। तमिल होने के कारण उसकी भाषा समझने में आ रही मुश्किलों के कारण संस्था ने तमिलनाडु में बनयन संस्था के साथ संपर्क किया और रजिन्द्र कौर के नेतृत्व में मैरी को तमिलनाडु में बनयन संस्था में दाखिल करवाया गया। उन्होंने बताया कि बनयन संस्था द्वारा कुछ ही दिनों में उसके परिवार का पता लगाकर उसको उसके वारिसों को सुपुर्द कर दिया गया। शमशेर सिंह ने बताया कि समाज में यदि ऐसे लोगों को उपचार और पुनर्वास का अवसर मिल सके, तो ये लोग अपनों को मिलने के अतिरिक्त अपने पैरों पर खड़ा होकर मान-सम्मान वाला जीवन भी जीने के योग्य बन जाते हैं।

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