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इकलौती गायनी सर्जन के जाने पर होगी परेशानी

3 वर्ष पहले
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30 मई को एलएनजेपी अस्पताल की इकलौती गायनाकोलॉजिस्ट डॉ. रजनी नौकरी छोड़ देंगी। अभी अस्पताल में 8,176 गर्भवती पंजीकृत हैं। अब डिलीवरी की चिंता सताने लगी है। 30 मई के बाद अस्पताल में सिर्फ नॉर्मल डिलीवरी केस ही लिए जाएंगे। सिजेरियन डिलीवरी की कोई सुविधा नहीं होगी। जिला अस्पताल में हर माह औसतन 350 डिलीवरी होती हैं जिनमें से 106 सिजेरियन डिलीवरी होती हैं।

अस्पताल में जून में करीब 20 महिलाओं की डिलीवरी होनी है। डॉ. रजनी के 30 मई तक अस्पताल छोड़ने के बाद कोई सर्जन नहीं होंगी। जिला अस्पताल में तीन गायनॉकोलोजिस्ट थीं।

कुछ समय पहले डॉ. उमा पदोन्नत होकर जींद चली गईं। वहीं डॉ. सुरभि की पोलीक्लीनिक में डेपुटेशन हो गई। उनके बाद से सर्जन के तौर पर जिला अस्पताल में डिलीवरी की कमान डॉ. रजनी के हाथों में थी। वहीं गायनी विभाग में दो एमओ डॉ. महक, डॉ. मनोदा हैं। लेकिन ये चिकित्सक केवल नॉर्मल डिलीवरी को ही हैंडल कर पाती हैं। अस्पताल में वर्ष 2016-2017 में 9089 में से 1,281 सिजेरियन डिलीवरी हुईं। जबकि 2017-2018 में 8,481 में से 1289 की सिजेरियन डिलीवरी हुईं। जिला अस्पताल की गायनी ओपीडी में हर रोज करीब 100 से 120 महिलाएं जांच के लिए जिला अस्पताल में पहुंच रही हैं।

सिजेरियन को लेकर डिलीवरी को लेकर बनाई जाएगी व्यवस्था : एमएस डॉ. मनजीत सिंह ने कहा कि डॉ. रजनी के जिला अस्पताल से जाने के बाद सिजेरियन डिलीवरी को लेकर महिलाओं को परेशानी आना लाजिमी है। लेकिन वह गर्भवती महिलाओं के लिए बेहतर व्यवस्था बनाने का प्रयास करेंगे। सिजेरियन डिलीवरी के लिए निजी अस्पताल से गायनॉकोलोजिस्ट को हायर किया जाएगा।

कुरुक्षेत्र | एलनजेपी अस्पताल में गर्भवती का उपचार करती चिकित्सक।

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