नाभीकमल व जाट महासभा के बीच जमीन मामले में जाट सभा द्वारा टोटल सर्वे मशीन के जानकार अधिकारी की मौजूदगी में निशानदेही करवाने की मांग ने प्रशासन को पशोपेश में डाला हुआ है। प्रशासन को निशानदेही करवा कब्जा मिलने पर उसे साफ कर मंदिर को सौंप 28 मई को कोर्ट में जवाब देना है। प्रशासन अभी तक ऐसे सरकारी अधिकारी या कर्मचारी को नहीं खोज पाया जो टोटल सर्वे मशीन को हैंडल करने की जानकारी अच्छे से रखता हो। मामले में ड्यूटी मजिस्ट्रेट एसडीएम ने सोमवार को राजस्व विभाग के अधिकारियों की बैठक बुलाई है। वहीं मंदिर की ओर से याची पक्ष कुलदीप सिंह का कहना है कि कई दिन से प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं। कोर्ट के आदेशों के बावजूद प्रशासन जाट सभा के दबाव में कब्जा दिलाने की कार्रवाई लटका रहा है।
एसडीएम अनिल यादव ने बताया कि दोबारा निशानदेही के लिए सोमवार को राजस्व विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। नायब तहसीलदार परमिंद्र सिंह ने कहा कि पिछली निशानदेही के दौरान जाट महासभा ने सर्वे मशीन संचालक पर आपत्ति की थी। लिहाजा इस बार प्रशासन ही अपने स्तर पर ऐसे टोटल सर्वे मशीन संचालक को लाएगा। जिसपर दोनों पक्ष सहमत हों।
नाभीकमल जमीन मामले में प्रशासन पर ढीली कारवाई का आरोप लगाते कुलदीप व अन्य ।
जानकारी अधिकारी की मौजूदगी में होनी चाहिए:अंग्रेज सिंह
जाट सभा सदस्य अंग्रेज सिंह ने कहा कि पिछली निशानदेही के दौरान मशीन संचालक द्वारा की गई निशानदेही पर जब उन्होंने आपत्ति जताई थी, तो तीन फुट का फर्क मिला था। अब भी उनकी यही मांग है कि सर्वे मशीन से निशानदेही के दौरान ऐसा सरकारी अधिकारी या कर्मचारी साथ होना चाहिए जिसे सर्वे मशीन का पूरा ज्ञान हो।
जानबूझ कर प्रशासन लटका रहा कार्रवाईः नाभी कमल मंदिर याची
नाभीकमल मंदिर की ओर से याची कुलदीप सिंह ने कहा कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद निशानदेही की कार्रवाई जानबूझ कर लटकाई जा रही है। प्रशासन जाट सभा के दबाव में है। कहा अब 28 मई की तारीख कोर्ट ने तय की है। अभी भी निशानदेही के मूड में नहीं लग रहा। गौरतलब है कि 30 अप्रैल को कोर्ट के आदेशानुसार टोटल सर्वे मशीन के जरिए निशानदेही करवाने प्रशासन मौके पर पहुंचा था। दो घंटे तक निशानदेही की कार्रवाई तब चली थी। इस दौरान जाट महासभा की बिल्डिंग का कई फुट हिस्से सहित मुख्य गेट भी नाभीकमल की जगह में आया था। निशानदेही के दौरान तीन फुट का अंतर आने पर जाट महासभा ने टोटल सर्वे मशीन संचालक पर सवाल उठा निशानदेही मानने से इनकार कर दिया था। इससे पहले न्यायाधीश नीतू नागर की कोर्ट ने भूमि की दोबारा टोटल सर्वे मशीन से निशानदेही करवा, उक्त जगह में कब्जा मिलने पर उसे साफ कर मंदिर को देने के लिए लोकल कमिश्नर नियुक्त किया था।