ब्रह्मसरोवर के किनारे पर राहगीरी के मुख्य आकर्षण 4 किलोमीटर की मैराथन के लिए प्रशासन को धावक ही नहीं मिले। दावा था कि राहगीरी में 20 हजार लोग जुटेंगे लेकिन मैराथन के लिए 20 धावक जुटाने में भी पसीने छूट गए। न तो प्रोफेशनल धावक जुटे और न शहरवासियों ने दिलचस्पी दिखाई। पुलिस अफसरों ने टीचरों से कहा कि बच्चों को मैराथन में दौड़ाएं तो जवाब मिला-नहीं दूसरे इवेंट में भाग लेने आए हैं। खफा हुए सीएम मनोहरलाल ने राहगीरी के संयोजक एडीजीपी ओपी सिंह पूछ ही लिया-क्या यही इंतजाम हैं। यह तक नहीं पता कि मैराथन कहां से शुरू होगी और कहां खत्म।
आखिर कुछ अफसर व अन्य लोग दौड़ने को राजी हुए। सीएम ने झंडी दिखाई और लोगों को मोटिवेट करने के मकसद से राज्यमंत्री कृष्ण बेदी, विधायक सुभाष सुधा व डॉ. पवन सैनी को साथ लेकर करीब 50 मीटर खुद भी दौड़े। सीएम ने राहगीरी में हिस्सा ले रहे शहरवासियों के अलग-अलग खेल को देखा। बच्चों को मलखंब पर करते देख सीएम ने बच्चे को कंधे पर ही खड़ा कर लिया। सीएम ने बॉक्सिंग ग्लब्स पहनकर पंच जमाए तो हॉकी स्टिक पर भी हाथ आजमाए। फिर गिल्ली-डंडा खेलने के लिए पहुंचे। सीएम ने कहा कि जिस देश के लोग जितने खुश होते हैं उसका विकास भी उतना ही तेज होता है। इसी को ध्यान में रखकर 13 जिलों में राहगीरी कार्यक्रम शुरू हो गया है। राहगीरी के लिए सुबह छह बजे का समय था पर सीएम सात बजे मुख्य मंच पर पहुंचे और आठ बजे वे चले गए।