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भगवान शिव की शरण में आने वाले में अहंकार नहीं रहता : शुकदेवाचार्य

3 वर्ष पहले
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दुखभंजन महादेव मंदिर में चल रही शिव कथामृत में कथावाचक शुकदेवाचार्य ने कहा कि निर्मल जन ही शिव को पा सकते हैं व जो शिव की शरण में आ जाता है, शिव प्रभु उसमें अभिमान या अहंकार रहने ही नहीं देते। उन्होंने एक प्रसंग में बताया कि ब्रह्मा जी तथा विष्णु जी दोनों अपने आप को बड़ा कहने लगे। भगवान शिव ने उनका अभिमान हरने के लिए एक ज्योति प्रकट की जिसका एक छोर दिखाई नहीं दे रहा था। शिव ने कहा कि जो इसका आदि-अंत पता कर लेगा वही बड़ा होगा। इस पर ब्रह्मा जी ऊपर चले गए और विष्णु जी नीचे। वर्षों तक मन की गति से वाली ज्योति का आदि-अंत नहीं मिला। ब्रह्मा जी ने लोभ वश केतकी के फूल व गाय से कहा कि आप गवाह बन जाओ तो मैं संसार में तुम्हे पूजनीय बना दूंगा। विष्णु जी ने शिव से कहा कि प्रभु आप ही बड़े हो, आपका आदि, मध्य या अंत नहीं पाया जा सकता। ब्रह्मा जी शिव से आकर कहने लगे कि उन्होंने अंत पा लिया है तथा गवाह उनके साथ है। इस पर शिव जी ने ध्यान लगाकर देखा तो उन्हें सब पता चल गया। शिव जी ने इस झूठ पर ब्रह्मा जी से कहा कि पुष्कर को छोड़कर आपकी संसार में कहीं पूजा नहीं होगी और न ही कहीं मंदिर होगा तथा शिव पूजा में केतकी फूल नहीं चढ़ेगा। शिव जी ने वचन किए कि यह ज्योति मेरे नाम से पूजी जाएगी तथा इसे शिवलिंग कहा जाएगा, शिव निराकार ज्योति स्वरूप है तथा शिव निराकार उपासना का प्रतीक है।

शिव पुराण आरती में एमके मौदगिल, सुरेंद्र कांसल धूरी, संजय मेहता, महेंद्र जिंदल, मोहन भारद्वाज, आचार्य विनोद मिश्र, जगन्नाथ शर्मा, ज्ञानचंद शर्मा, सुरेंद्र गौतम, दीपक शर्मा, कृष्ण बलदेव कौशिक, सीएल बजाज, सुरेंद्रपाल कौशिक और देवेंद्र शर्मा फरल मौजूद रहे।

कुरुक्षेत्र | दुखभंजन महादेव मंदिर में आयोजित शिवकथा पूजन एवं आरती करते यजमान।

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