कर्म व भक्ति से मिल सकते हैं परमात्मा: प्रो. सुधीर
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के संस्कृत पालि प्राकृत विभाग एवं संस्कृत प्राच्य विद्या संस्थान की ओर से दो दिवसीय संगोष्ठी एवं भट्टाचार्य स्मृति व्याख्यान आयोजित किया गया। उद्घाटन सत्र में पंजाब यूनिवर्सिटी के प्रो. सुधीर कुमार ने कहा कि भारतीय विद्या एवं ज्ञान में समन्वय दृष्टि की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक बुद्धि एवं योगियों की मेधा को पृथक मानना अनुचित है। परा और अपरा विद्या दोनों परम प्रज्ञा के ही अंग हैं। ज्ञान, कर्म व भक्ति तीनों मार्ग परस्पर संयुक्त हैं जिनसे परमात्मा को प्राप्त किया जा सकता है। चैतन्य अथवा आत्मा का कोई लिंग नहीं होता। महात्मा गांधी, लाला लाजपत राय, स्वामी विवेकानंद, वीर सावरकर एवं अरविंद के दर्शन वर्तमान में बहुत प्रासंगिक हैं। इस अवसर पर मुख्यातिथि डॉ. कृष्ण कुमार शर्मा, विशिष्ट अतिथि लाडवा विधायक डॉ. पवन सैनी, डॉ. हिम्मत सिंह सिन्हा, डॉ. राजेंद्र, डॉ. सोमेश्वर दत्त, प्रो. आरपी मिश्र, डॉ. विभा अग्रवाल और डॉ. रमाकांत आंगिरस मौजूद रहे। कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुरेंद्र मोहन मिश्र ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर डॉ. महेंद्र हंस, डॉ. राजेंद्र राणा, डॉ. सीडीएस कौशल, डॉ. रामचंद्र, डॉ. विनय, प्रो. डी मुखर्जी, प्रो. आईसी मित्तल, डॉ. शशी मित्तल, अंग्रेज शास्त्री, मुकेश कौशिक, रोहित कौशिक, रामफल, शरण, मीना, दीपक, डॉ. राकेश, मीरा और स्वर्णप्रभा मौजूद थी।