डीसी बोले-20 के बाद चावल का स्टॉक कम मिला तो होगी एफआईआर
राइस मिलर्स को अगले पांच दिनों में कस्टम मिलिंग का चावल सरकारी एजेंसियों को देना होगा। 20 मई के बाद प्रशासन स्टाॅक की जांच कराएगा। इस दौरान यदि मिलिंग चावल स्टाॅक कम मिलता है तो संबंधित मिर्लस के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। ये आदेश मंगलवार को डीसी डाॅ. एसएस फुलिया ने मिलर्स एसोसिएशन पदाधिकारियों को दिए। मंगलवार को डीसी ने लघु सचिवालय में मिलर्स और डीएफएएससी व एजेंसी अधिकारियों की मीटिंग बुलाई थी। मिलर्स भी अपनी समस्याएं बताने की मंशा से पहुंचे थे।
यहां कस्टम मिल चावल,सीएमआर को लेकर चर्चा हुई। डीसी ने सीएमआर को लेकर अधिकारियों और मिलर्स को आदेश दिए कि 20 मई तक सीएमआर यानी जीरी कूटने के बाद निकाले गए चावलों की सप्लाई संबंधित विभाग को देनी होगी। देरी के लिए मिलर्स को कारण बताओ नोटिस जारी करके देरी का कारण पूछा जाएगा। अधिकारियों से कहा कि मिलिंग चावल एकत्रित करने में कोताही नहीं होनी चाहिए। डीसी ने डीएफएसएसी व अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएमआर के लिए जितना माल भेजा गया था, उसमें से बकाया स्टाक की जांच की जाए। यदि किसी मिलर्स के पास स्टाक कम मिलता है तो एफआईआर दर्ज कराई जाए। यदि अफसर लापरवाही बरतेंगे, तो उन पर भी एक्शन लिया जाएगा। हालांकि मीटिंग में मिलर्स की समस्याएं भी सुनी। मिर्लस ने कस्टम मिलिंग रेट को लेकर नाखुशी जताई। वहीं हरियाणा राइस मिर्लस एसोसिएशन के चेयरमैन ज्वैल सिंगला का कहना है कि अब कुछ ही मिर्लस पर थोड़ा थोड़ा चावल बाकी है। एफसीआई की तरफ से देरी हुई।
कुरुक्षेत्र | राइस मिलर्स व अधिकारियों की बैठक लेते डीसी डॉ. एसएस फुलिया।
28 मिलों पर बाकी 20 हजार एमटी
जिले में इस साल 205 राइस मिलों को कस्टम मिलिंग के लिए 11 लाख 47 हजार 271 एमटी जीरी दी गई थी। प्रति क्विंटल के पीछे मिलर्स को 67 किलो के हिसाब से चावल सरकार को जीरी कूट कर देना है। करीब सात लाख 68 हजार 671 एमटी चावल मिलर्स पर बनता है। हालांकि डीएफएससी वीरेंद्र के मुताबिक सात लाख 47 हजार 787 एमटी चावल मिल चुका है। अब जिले में 28 मिलर्स पर करीब 20 हजार एमटी चावल ही बाकी है। 97 प्रतिशत डिलीवरी हो चुकी है। यह चावल सेंटर पूल के लिए भेज दिया गया है। एसो के चेयरमैन बोले जल्द ही सभी मिर्लस पूरी सप्लाई दे देंगे। बताया कि मिलर्स को प्रति क्विंटल महज 10 रुपए ही सरकार की तरफ से दिए जाते हैं।
31 मार्च तक था समय
बता दें कि हर साल जीरी मिलर्स को चावल बनाने को सरकार देती है। 31 मार्च तक चावल तैयार कर सरकार को देना होता है। लेकिन अबके डेढ़ माह से ज्यादा समय हो चुका है। वहीं डीसी ने कहा कि उनकी सभी समस्याएं जल्द दूर कराई जाएंगी।