श्रमिकों कानून में संशोधन के विरोध में रोष मार्च
निर्माण कार्य मजदूर मिस्त्री यूनियन के सैकड़ों सदस्यों ने प्रदेश सरकार द्वारा निर्माण कार्य श्रमिकों के हित में बने कानून में किए गए संशोधन के विरोध में एकजुट होकर नए बस स्टैंड से लघु सचिवालय तक रोष मार्च निकाला। साथ ही मुख्यमंत्री के नाम मांगों का ज्ञापन डीसी को सौंपा। यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कामरेड करनैल सिंह ने कहा कि मजदूर वर्ग को जितने भी अधिकार मिले हैं वे लंबे संघर्ष व प्रदर्शनों के बाद मिले हैं। सरकारों को जब भी मौका मिलता है तो पूंजीपतियों के हित में मजदूरों के अधिकारों में कटौती करती रहती हैं। केंद्र व प्रदेश में जब से भाजपा की सरकारें बनी है तब से मजदूरों के अधिकारों में कटौती करने की गति और भी तेज हो गई है।
हरियाणा बीओसीडब्ल्यू वेलफेयर बोर्ड के तहत निर्माणकार्य श्रमिकों को पंजीकरण करवाने के बाद कुछ कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलता है, बोर्ड से मिलने वाले लाभों को प्राप्त करने की प्रक्रिया इतनी जटिल बना दी है कि इससे नाम मात्र मजदूरों को ही लाभ मिलता है। सरकार ने 27 अप्रैल को हरियाणा भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्तें विनियमन) नियम 2005 के नियम 28 में उपनियम 3 खंड में पूरी तरह पक्षपातपूर्ण व श्रमिक विरोधी संशोधन किया है, कि अब उक्त विषय से संबंधित सभी पंजीकृत श्रमिक यूनियन की बजाय मात्र सात ट्रेड यूनियनों से संबद्ध ट्रेड यूनियनों को ही श्रमिकों की वेरिफिकेशन करने का अधिकार होगा । एडवोकेट सुदेश कुमारी ने कहा कि ऐसी व्यवस्था मनपसंद यूनियन का सदस्य बनने के मौलिक अधिकार पर हमला है। जब सभी यूनियन एक ही कानून भारतीय ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 के प्रावधानों के अनुसार पंजीकृत हैं तो मात्र सात यूनियनों को ही श्रमिकों की वेरिफिकेशन का अधिकार देना तथा अन्य सभी पंजीकृत यूनियनों से अधिकार छीनना कानून विरोधी है। इस मौके पर यूनियन महासचिव सुरेश कुमार, राज्य उपप्रधान पाल सिंह, मनरेगा मजदूर यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष कामरेड फूल सिंह, नरेश, ईश्वर गुहणा, रामचंद्र, देवीदयाल व कविता विद्रोही सहित अन्य मौजूद रहे।