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कौशल विकास विषयों को भाषा विषयों की जगह देने पर हरियाणा राजकीय अध्यापक संस्कृत संघ ने किया प्रदर्शन
हरियाणा राजकीय संस्कृत अध्यापक संघ के शिक्षकों ने बुधवार को अपनी मांगों को लेकर डीसी कार्यालय पर प्रदर्शन कर डीसी को सीएम के नाम ज्ञापन सौंपा। संस्कृत शिक्षकों ने कौशल विकास के विषयों को भाषा विषयों के स्थान पर देने का विरोध किया।
संघ के जिला प्रधान पवन भारद्वाज ने एनएसक्यूएफ विषय को छठे विषय के वैकल्पिक विषय में न रखकर अतिरिक्त विषय के रूप में पढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों में एनएसक्यूएफ के लिए शिक्षा विभाग द्वारा पत्र जारी किया गया। जिसमें नौवीं कक्षा से 40-40 विद्यार्थियों को विकास कौशल के विषय अनिवार्य रूप से देने को कहा है, इस पत्र को वापस लिया जाए। राजकीय अध्यापक संघ 70 के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. रजनीश कौशिक ने कहा कि भाषा के विकल्प में केवल भाषा का ही विकल्प दिया जाए। उन्होंने कहा कि आठवीं कक्षा तक लागू तीन भाषाओं के फार्मूले को 10वीं तक लागू किया जाए। ताकि भारतीय भाषाओं का विकास हो सके।
कुरुक्षेत्र | लघु सचिवालय पर मांगों को लेकर रोष जताते संस्कृत अध्यापक ।
भाषाओं को खत्म करने की है योजना : कौशिक
डॉ. कौशिक ने कहा कि सरकार की योजना संस्कृत, पंजाबी व उर्दू भाषाओं को खत्म करने की है। यह पूरी तरह से गलत है। उन्होंने कहा कि फिलहाल नौवीं से 12वीं तक इसे लागू किया गया है और आने वाले समय में छठी कक्षा से ही कौशल विकास को लागू कर भाषाओं को खत्म कर दिया जाएगा। जिसे शिक्षक किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। ज्ञापन सौंपने वालों में डॉ. ओमप्रकाश शर्मा और महावीर शास्त्री सहित कई संस्कृत शिक्षक शामिल रहे।