सन्निहित सरोवर स्थित प्राचीन श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर में पवित्र पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में भगवान श्री लक्ष्मीनारायण का पूजन अनुष्ठान किया गया। यह विशेष पूजा 13 जून तक चलेगी। मंदिर महंत विजय गिरि के सान्निध्य में व्यवस्थापक स्वामी अनूप गिरी महाराज ने श्रद्धालुओं को पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु पूजा का महत्व बताया। विशेष मास में जो व्यक्ति श्रद्धा भक्ति के साथ व्रत, उपवास व पूजा इत्यादि शुभ कर्म करता है, वह अपने समस्त परिवार के साथ गोलोक में पहुंच कर भगवान श्री कृष्ण का सान्निध्य प्राप्त करता है। यह मास 12 महीनों में सर्वश्रेष्ठ पुरुषोत्तम मास के नाम से विख्यात है। अधिक या मल मास का अभिप्राय निन्दित एवं वर्जनीय मास नहीं अपितु मनुष्य के निंदनीय पाप कर्मों को प्रवाहित गंगा धारा में धो डालने वाला मास ही मलमास कहलाता है। क्योंकि इस मास को भगवान विष्णु ने स्वयं अपना नाम पुरुषोत्तम देकर कहा कि अब मैं स्वयं इस मास का स्वामी हो गया हूं। इस मास में भगवान विष्णु की भक्ति करनी चाहिए और पाप कर्मों जैसे निंदा, चुगली करना, झूठ बोलना, दूसरे का धन चुराना, परस्त्रीगमन करना एवं गुरु की निंदा इत्यादि से दूर रहना चाहिए। उन्होंने बताया कि जब तक घड़े में छिद्र रहेगा तब तक उसमें पानी नहीं टिकेगा, इसी तरह जब तक जीवन में बुराई रहेगी तब तक प्रभु की कृपा प्राप्त नहीं होगी। उन्होंने कहा इस मास दोनों पक्षों में संक्रांति का अभाव होने से ज्येष्ठ अधिक मास घटित हुआ है। इस मास में लक्ष्मीनारायण की पूजा विशेष फलदाई मानी गई है। मंदिर में चल रहे पूजा अनुष्ठान में बड़ी संख्या में आए यजमानों ने भाग लिया। लक्ष्मीनारायण आरती में पंडित बलराज कौशिक, मुकुल बाबा, पुजारी अन्नु भारद्वाज और रजत दीक्षित सहित अन्य शामिल रहे।