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‘मलबे का मालिक’ से दिया हिंसा खत्म करने का संदेश

3 वर्ष पहले
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कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शिक्षक क्लब में कला भारती के तत्वावधान में सोमवार को मलबे का मालिक नाटक का मंचन किया गया। नाटक में देश के बंटवारे की यादें भी ताजा की। दिखाया गया कि कैसे सियासत की वजह से भाइयों की तरह रहने वाले हिंदू व मुस्लिम बंटवारे के समय एक-दूसरे के दुश्मन हो गए थे। साथ ही दिखाया गया कि दंगे और हिंसा कभी मानवता, शांति और देशहित में नहीं होते। युद्ध से शांति कायम नहीं की जा सकती। बतौर मुख्यातिथि कला भारती के अध्यक्ष डॉ. अशोक यमन सैनी ने कहा कि देश में एकता, अखंडता, भाईचारे और अमन शांति कायम करने के लिए युवाओं को आगे आकर अपनी जिम्मेदारी संभालनी होगी। कहा कि धर्म और जाति के नाम देश के टुकड़े करने के सपने देखने वाले सियासी हथकंडों को समझना होगा। तभी देश का सही अर्थों में निर्माण होगा।

इन्होंने निभाई मुख्य भूमिकाएं : नाटक में मोनिका महिवाल, ज्योति जांगड़ा, वीर सिंह, योगेश कुमार, रोबिन पंजेटा, विनोद, रोहित, युवराज धीमान ने भूमिका निभाई। नाटक के निदेशक अमित चौहान व संतलाल, शिक्षक क्लब की अध्यक्ष प्रो. निर्मला चौधरी ने कहा कि देश एकता, अखंडता, भाईचारे, अमन शांति को प्रोत्साहित करने के लिए ऐसे नाटकों का मंचन जरूरी है।

देश के बंटवारे के यादें ताजा हुईं

कुरुक्षेत्र | केयू में नाटक मलबे के मालिक की कहानी नाटक का मंचन करते कलाकार ।

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