- Hindi News
- National
- घर में सो रहे दो बच्चे व शिक्षिका जिंदा जली, आग से गिरी कवेलूपोश की छत से दबे तीनों, पलंग ज्यादा जला इसलिए आत्मदाह की आशंका
घर में सो रहे दो बच्चे व शिक्षिका जिंदा जली, आग से गिरी कवेलूपोश की छत से दबे तीनों, पलंग ज्यादा जला इसलिए आत्मदाह की आशंका
भास्कर संवाददाता | मोहकमपुरा/कुशलगढ़
सब्बलपुरा पंचायत के डूंगरीपाड़ा फलिया मोहल्ले में मंगलवार शाम दर्दनाक हादसे में शिक्षिका अपनी 7 साल की बेटी और 2 साल के मासूम बेटे के साथ बिस्तर पर ही जिंदा जल गई। आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन बिस्तर के पास ही केरोसिन का डिब्बा मिलने से आत्महाद व हत्या की आशंका खड़ी हो रही है। मौके के हाल से ऐसा लग रहा था कि टापरे की छत गिरने से आग इतनी तेजी से फैली कि गेट खुला होने के बाद भी निकलने तक का मौका नहीं मिला। चिल्लाने की आवाजें सुनकर पड़ाेसी मदद के लिए दौड़े लेकिन पूरा मकान आग की लपटों से घिर चुका था। ग्रामीणों ने बर्तन और बाल्टियों से जैसे-तैसे कर आग पर काबू पाया। लेकिन तब तक महिला और उसके दोनों बच्चों के कंकाल ही बचे थे।
शाम 4.30 बजे हुए हादसे में निजी स्कूल में शिक्षिका रीता (30)प|ी विकास भूरिया, उसकी 7 वर्षीय बेटी जानू और 2 साल के बेटे जिगर की मौत हुई है। विकास महाराष्ट्र में मजदूरी करता है। मकान के आधे हिस्से में कवेलू और आधे में सीमेंट के पतरे लगे हैं। छत पर घास के पूळे रखे हुए थे। एकाएक मकान में लाग फैली और छत नीचे आ गिरी। पलंग पर सो रही रीता और उसके बच्चों को हिलने तक का मौका नहीं मिला और मलबे में दबकर जिंदा जल गए। रीता के पीहर के लोग नहीं आने पर तीनों के शव मोर्चरी में रखवाए गए। मकान में आग की सूचना पर करीब 6 बजे उपखंड अधिकारी जयवीरसिंह कालेर, तहसीलदार परमानंद मीणा और कुशलगढ़ थाने से किलेंद्रसिंह दल के साथ पहुंचे। आग बुझाने के भी काफी देर तक घर में से धुआं उठता रहा। मृतका का पीहर गुजरात में है। वहां से देर रात तक उसके परिजन गांव नहीं पहुंचे थे।
डेढ़ घंटे बाद पहुंची दमकल तब तक कंकाल ही बचे थे
ग्रामीणों ने बताया कि आग लगने पर स्थानीय सरपंच पति मांगीलाल ने फायर ब्रिगेड काे इत्तला दी थी लेकिन डेढ़ घंटे तक कोई मदद नहीं मिल पाई। जहां यह हादसा हुआ वहां से दमकल कार्यालय 25 किलोमीटर दूर है। ऐसे में अगर ग्रामीणों का आरोप सही है तो यह साफ तौर पर फायर ब्रिगेड की लापरवाही को उजागर कर रहा है। हालांकि एसडीएम काले ने इसे गलत बताते हुए दमकल के समय पर ही पहुंचने की बात कही है। उन्होंने पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता दिलवाने का भी भरोसा दिया है।
आंखों देखी: मैं बाहर खेल रहा था, आग की लपटें देख दौड़ा, लेकिन बचा नहीं पाया
मैं खाना खाने के बाद घर के बाहर खेल रहा था। तभी, भाभी के कमरे से लपटें उठी देखी। मैं कुछ समय पहले ही वहां से लौटा था। मुझे पता कि चचरे भाई-बहिन कमरे में सो रहे हैं। आग की लपटें देख मैं घबरा गया। मैंने भीतर जाने की कोशिश की, लेकिन चंद मिनटों में ही पूरे मकान में आग फैल गई। सबकुछ इतना जल्दी हो गया कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। मैं मदद के लिए चिल्लाने लगा। आवाज सुनकर मेरे पड़ोसी और गांव वाले आए और जिसे जो मिला उससे आग बुझाने में लग गए। जिस वक्त आग लगी तब पापा कुछ दूर खेत में कपास की फसल के डंठल बीनने गए थे। कपास की गठरी लेकर लौट रहे थे तभी मेरे चिल्लाने की आवाज सुनकर घर की तरफ दौड़े। घर को आग की लपटों से घिरा देख वह रो पड़े। मैंने उन्हें संभालने की कोशिश की। जब आग बुझी कुछ भी नहीं बचा।
(मृतका रीता के 12 वर्षीय देवर विवेक इस घटना का प्रत्यक्षदर्शी है। उसने भास्कर को आखों-देखी बताई।)
दो साल का जिगर
शिक्षिका रीता
पलंग के पास मिला केरोसिन का डिब्बा
रीता के घर से केरोसिन की बदबू आ रही थी। जहां रीता का शव मिला, उसके नीचे केरोसिन का डिब्बा भी मिला। मौका हाल देखने वाले हैड कांस्टेबल मनोज का कहना है कि आग सबसे ज्यादा पलंग के हिस्से में लगी। घर में गैस चूल्हा है जो भी दूसरे कमरे में था। ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि केरोसिन का डिब्बा पलंग के पास कैसे पहुंचा या फिर पलंग के नीचे ही रखा हुआ था। हो सकता है कि किसी विवाद की वजह से रीता ने यह कदम उठाया हो। दरवाजा खुला होने से यह भी आशंका है कि तीनों को जलाकर कोई बाहर निकल भागा हो। पुलिस इन सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।
3 साल पहले भी 2 बच्चों सहित जिंदा जली मां
कुशलगढ़ के करमदिया गांव में भी 10 मार्च, 2015 में ऐसा ही हादसा हुआ था। जहां एक रिहायशी मकान में रोटी बनाते वक्त आग लगने से भूरी प|ी शांतिलाल अपने बेटे अरविंद और बेटी पायल समेत जिंदा जल गई थी। उस रोंगटे खड़े कर देने वाले हादसे को ग्रामीण अभी भूल नहीं पाए थे कि क्षेत्र में दोबारा ठीक ऐसी ही घटना ने सभी को चौंका दिया है।