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3500 जीवित बच्चियों में से एक को होती है यह बीमारी

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा

कुशलगढ़ उपखंड में स्थित वड़लीपाड़ा गांव की गर्भवती महिला ने मंगलवार को बेटे की चाहत में पांचवीं बेटी का जन्म दिया। बेटी को अनुवांशिक ऐसी बीमारी है जो 3500 जीवित बच्चियों में से एक को होती है। डॉक्टरों ने रैफर करने के लिए कहा तो पिता ने साफ इनकार कर दिया। टर्नर सिंड्रोम की इस बीमारी में सेक्शुअल लाइफ सही नहीं होती। साथ ही इन्हें जीवन के एक पड़ाव में ह्रदय रोग की तकलीफ भी होने लगती है। इस कारण बच्ची का भविष्य शारीरिक, मानसिक व सामाजिक रूप से भी दुखदायी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह सिंड्रोम बच्चियों में ही देखने को मिलता है। इस बच्ची को वड़लीपाड़ा गांव की सीमा प|ी देवीलाल ने बड़वास छोटी स्थित प्रसव केंद्र पर जन्म दिया। जब गुरुवार को उसे महात्मा गांधी अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में दाखिल किया गया तो पता चला की बच्ची टर्नर सिंड्रोम से ग्रसित है।

यह है लक्षण : इस रोग में छोटी गर्दन, गर्दन की चमड़ी में फोल्डिंग, कानों में असमानता, स्तनों में दूरी, छोटी अंगुलियां, हाथ पैरों में सूजन, छोटा कद, मासिक धर्म में अवरोध जैसे प्रमुख लक्षण हैं।

कुशलगढ़ के वड़लीपाड़ा गांव की महिला, नवजात टर्नर सिंड्रोम की जकड़ में
बेटे की मां बनने की चाहत में पांचवीं बेटी जन्मी, पिता का इलाज कराने से इनकार
बेटी को रैफर करने को कहा तो मना कर दिया
इसलिए होता है यह सिंड्रोम : शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रद्युम्न जैन ने बताया कि यह सिंड्रोम एक अनुवांशिक विकार है। यह सिर्फ 35 सौ जिंदा बच्चियों में महज एक को होता है। इसका कारण एक्स क्राेमोजोम का अनुपस्थित या अपूर्ण होना होता है। यह फिमेल चाइल्ड में ही होता है।

पिता देवीलाल ने बताया कि उसके पहले 4 बेटियां हो चुकी हैं, जिनमें एक की मौत हो गई है। मंगलवार को 5 वीं बेटी ने जन्म लिया। देवीलाल को इतनी बेटियों के जन्म लेने के बारे में पूछा तो बताया कि हमें बेटे की जरूरत थी। दूसरी ओर जब एसएनसीयू वार्ड में डॉक्टर ने बच्ची को हायर सेंटर पर रैफर करने के लिए परिजनों को सलाह दी तो पिता ने इनकार कर दिया।

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