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रैफर के दौरान नवजात ने रास्ते में तोड़ा दम, एंबुलेंस पायलट परिजनों को बीच रास्ते में उतारने पर अड़ा

3 वर्ष पहले
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बांसवाड़ा/कुशलगढ़| एंबुलेंसकर्मी की अमानवीयता का मामला गुरुवार को सामने आया। कुशलगढ़ के वसूनी गांव की सकीना प|ी लोकेश दामा को बुधवार को परिजन प्रसव पीड़ा बढ़ने पर एमजी अस्पताल लाए। जहां नवजात बच्चे को जन्म दिया। गुरुवार को सुबह नवजात के श्वांस लेने में तकलीफ को देखते हुए उसे बांसवाड़ा से उदयपुर रैफर कर दिया। लेकिन नवजात ने बीच रास्ते में सलुंबर में दम तोड़ दिया। बच्चे की मौत पर एंबुलेंसकर्मी पायलट और ईएमटी नवजात सहित परिजनों को वहीं छोड़ बांसवाड़ा के लिए लौटने लगे। वापस घर लौटने के लिए परिजनों ने उनसे काफी मान मनुहार की तो उन्हें फिर से गाड़ी में बिठाया और बांसवाड़ा लाकर छोड़ दिया। ऐसे में परिजन बांसवाड़ा से 80 किमी दूर अपने निवास स्थान निजी वाहन कर नवजात के शव को ले गए और दाह संस्कार कराया। 108 एंबुलेंस बांसवाड़ा शहर की थी।

हमारे प्रोटोकॉल में नहीं

108 के ईएमई सुनील कुमार ने बताया कि रैफर के दौरान किसी की मौत हो जाए तो उसे पास ही स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया जाता है। हमारे प्रोटोकॉल में ही नहीं है कि उन्हें वापस घर छोड़ा जाए। ये बात अलग है कि मानवता के नाते उन्हें वापस छोड़े। कई बार ऐसी स्थितियां बनती है कि वापस लौटते वक्त कोई हादसा हो जाता है। प्राथमिकता घायलों को तत्काल सुविधा देने की होती है।

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