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कुशलगढ़ में सरकार के आदेश का कनिष्ठ लिपिक और सहायक कार्मिकों ने किया विरोध

3 वर्ष पहले
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कुशलगढ़| ग्राम पंचायतों में रिक्त् पड़े ग्राम विकास अधिकारियों का काम अब कनिष्ठ लिपिक और सहायक कार्मिक नहीं कर सकेंगे।

इसको लेकर 17 मई को राज्य सरकार की ओर से निकाले गए आदेश के विरोध में कनिष्ठ लिपिक अौर सहायक कार्मिकों ने रविवार को संसदीय सचिव भीमाभाई डामोर को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में बताया कि चार साल से पंचायतों में सरपंच और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर सरकारी योजनाओं और शिविरों का लाभ दिलाने में पूरा सहयोग करते आ रहे हैं। ऐसे में सरकार की ओर से 17 मई को जारी आदेश में हमारे अधिकारों का हनन किया है। ऐसे में कनिष्ठ सहायक नारायणसिंह राठौड़, बजरंगसिंह, यशवंतसिंह, मुकेश पणदा समेत पंचायतों में लंबे समय से रिक्त पड़े ग्राम विकास अधिकारी का काम देख रहे बाबुआें ने संसदीय सचिव को ज्ञापन देकर सरकार द्वारा लिए गए प्रत्याहरित आदेश को वापस लेने की मांग की है।

संसदीय सचिव को आदेश वापस लेने की मांग करते कनिष्ठ सहायक।

कुशलगढ़| ग्राम पंचायतों में रिक्त् पड़े ग्राम विकास अधिकारियों का काम अब कनिष्ठ लिपिक और सहायक कार्मिक नहीं कर सकेंगे।

इसको लेकर 17 मई को राज्य सरकार की ओर से निकाले गए आदेश के विरोध में कनिष्ठ लिपिक अौर सहायक कार्मिकों ने रविवार को संसदीय सचिव भीमाभाई डामोर को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में बताया कि चार साल से पंचायतों में सरपंच और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर सरकारी योजनाओं और शिविरों का लाभ दिलाने में पूरा सहयोग करते आ रहे हैं। ऐसे में सरकार की ओर से 17 मई को जारी आदेश में हमारे अधिकारों का हनन किया है। ऐसे में कनिष्ठ सहायक नारायणसिंह राठौड़, बजरंगसिंह, यशवंतसिंह, मुकेश पणदा समेत पंचायतों में लंबे समय से रिक्त पड़े ग्राम विकास अधिकारी का काम देख रहे बाबुआें ने संसदीय सचिव को ज्ञापन देकर सरकार द्वारा लिए गए प्रत्याहरित आदेश को वापस लेने की मांग की है।

कुशलगढ़| ग्राम पंचायतों में रिक्त् पड़े ग्राम विकास अधिकारियों का काम अब कनिष्ठ लिपिक और सहायक कार्मिक नहीं कर सकेंगे।

इसको लेकर 17 मई को राज्य सरकार की ओर से निकाले गए आदेश के विरोध में कनिष्ठ लिपिक अौर सहायक कार्मिकों ने रविवार को संसदीय सचिव भीमाभाई डामोर को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में बताया कि चार साल से पंचायतों में सरपंच और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर सरकारी योजनाओं और शिविरों का लाभ दिलाने में पूरा सहयोग करते आ रहे हैं। ऐसे में सरकार की ओर से 17 मई को जारी आदेश में हमारे अधिकारों का हनन किया है। ऐसे में कनिष्ठ सहायक नारायणसिंह राठौड़, बजरंगसिंह, यशवंतसिंह, मुकेश पणदा समेत पंचायतों में लंबे समय से रिक्त पड़े ग्राम विकास अधिकारी का काम देख रहे बाबुआें ने संसदीय सचिव को ज्ञापन देकर सरकार द्वारा लिए गए प्रत्याहरित आदेश को वापस लेने की मांग की है।

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