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दो लाख से अधिक जनता के स्वास्थ्य का जिम्मा जिस अस्पताल पर, वहां डॉक्टर और स्टाफ समय पर नहीं आता

3 वर्ष पहले
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सरकार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के गांव के गरीब तक निशुल्क पहुंचाने का दावा कर रही हैं, वहीं जिले से करीब 65 किमी. दूर कुशलगढ़ उपखंड मुख्यालय पर नगर सहित विभिन्न 38 ग्राम पंचायतों में निवास करने वाली आबादी के स्वास्थ्य, चिकित्सा सहित अन्य चिकित्सा योजनाओं को देने वाला कुशलगढ़ का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से राम भरोसे संचालित हैं।

वर्तमान में अस्पताल का समय सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तथा शाम को शाम 5 से 7 बजे तक निर्धारित है। ऐसे में कुशलगढ़ उपखंड मुख्यालय की सीएचसी पर साढ़े आठ बजे तक स्टाफ सहित चिकित्सक नहीं पहुंचते हैं, जबकि दूर दराज से मरीज पहुंच जाते हैं। बुधवार को सीएचसी में वसूनी निवासी प्रवीण कटारा अपनी प|ी सुनीता देवी जिला परिषद सदस्य के बीमार होने पर जांच व इलाज के लिए बुधवार सुबह आठ बजे पहुंचें, तब तक न तो रजिस्ट्रेशन खिड़की खुली थी और न ही कोई चिकित्सक पहुंचा था। जबकि चतुर्थ कर्मचारी साफ सफाई ही कर रहे थे ऐसे में कटारा ने इंतजार किया। इसके करीब पंद्रह मिनट बाद डाॅ. सुरेश जैन पहुंचे। इसके अलावा बाकी के चिकित्सक साढ़े आठ बजे तक आते रहे।

कुशलगढ़ सीएचसी के अलावा पूरे उपखंड क्षेत्र में आदर्श पीएचसी के रूप में मोहकमपुरा व छोटी सरवा में कुछ दिनों पूर्व ही सीएचसी में क्रमोन्नत होने पर भीमा भाई ने उदघाटन किया। इसके अलावा रामगढ़ व टिमेड़ा में स्थित पीएचसी केंद्र भी पीपीपी मोड पर होकर राम भरोसे संचालित हैं। जहां ग्रामीणों को नियमानुसार स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा है, वहीं कुशलगढ़ सीएचसी में प्रसूता लेबर कक्ष के पीछे लंबे समय से नाली पूरी तरह जाम होकर गंदगी से अटी पड़ी है। जिसके चलते प्रसुताओं, नवजात शिशु सहित वार्ड में भर्ती मरीजों को संक्रमण का खतरा है, लेकिन क्षेत्र की दो लाख के करीब आबादी के बिच स्थापित कुशलगढ़ सीएचसी कहने को सीएचसी जहां प्राथमिक इलाज के अलावा दूसरी कोई सुविधा नजर नहीं आती है।

कुशलगढ़ अस्पताल में खाली पड़ा डॉक्टर का रूम

इधर, तलवाड़ा अस्पताल में साढ़े तीन साल से बंद पड़ी एक्सरे मशीन, मरीजांे को नहीं मिल जांच की सुविधा

तलवाड़ा|कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों की जांच करने के लिए 2013 में खरीदी गई एक्सरे मशीन पिछले साढ़े तीन साल से बंद पड़ी है। ऐसे में यहां के लोगों को एक्सरे जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही। इस कारण महंगा शुल्क देकर निजी अस्पताल या लैब में जांच करानी पड़ रही है।

बंद पड़ी एक्सरे मशीन को ठीक तो करवा दी लेकिन ट्रांसफार्मर से आ रहे हाईवॉल्टेज के कारण कोई शुरू करने की रिस्क नहीं ले रहा। पहले रेडियोग्राफर की कमी थी। जनवरी 2018 से सहायक रेडियोग्राफर तो आ गया लेकिन मशीन शुरू नहीं की गई।बंद पड़ी एक्सरे मशीन को इंजीनियर को बुलाकर बताई तो उन्होंने कंसल्ट सॉफ्टवेयर रिस्टोर कराने की जरूरत बताई। इसके लिए 70 हजार रुपए का खर्च बताया। सीएचसी तलवाड़ा से प्रभारी अधिकारी को 19 फरवरी 17 को अवगत कराया गया था। इंजीनियर ने बताया कि अधिक वाल्टेज आने के कारण मशीन की प्लेटें जल चुकी थी, जिसे बदलवाया गया। इस मशीन को 400 वॉट की जरूरत है, लेकिन ट्रांसफार्मर से 490 वॉट करंट आने से एक्सरे मशीन के जल जाने की आशंका है। डिस्कॉम की ओर से लगे ट्रांसफार्मर से हाईवाल्टेज के कारण अस्पताल में मशीनें खराब होने की आशंका है।

डिस्कॉम की ओर से लगाए गए ट्रांसफार्मर से हाईवाल्टेज आने के कारण एक्सरे मशीन के खराब होने की आशंका है। ट्रांसफार्मर से जरूरी वाल्टेज की सप्लाई करने के लिए पत्र लिखा है। एक बार फिर स्मरण पत्र लिख देंगे ताकि एक्सरे मशीन शुरू कर सके और इसका लाभ मरीजों को मिल सके। डॉ. दीपक पंकज, प्रभारी अधिकारी।

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