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बजरिया सरकार मंदिर से 501 कलश से निकाली यात्रा

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | लहार/गोरमी

बजरिया सरकार हनुमान मंदिर लहार में रविवार को भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद भागवत महापुराण का आध्यात्म प्रारंभ किया गया। इससे पूर्व मंदिर प्रांगण से श्रद्धालु महिलाओं ने 501 कलश सिर पर रखकर नगर में यात्रा निकाली। कलश यात्रा के दौरान नगर वासियों ने फूलों की बरसा कर श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया। यात्रा के समापन पर भगवान श्रीकृष्ण के जलाभिषेक के बाद पंडित नरेशचंद्र शुक्ला ने कथा का प्रसंग प्रारंभ किया। पहले दिन की कथा में कथा व्यास ने बताया सभी भक्तगण नित्य रूप से सात दिन तक कथा का श्रवण करें। क्योंकि श्रीमद भागवत महापुराण सुनने से जीवन के सारे पाप धुल जाते हैं। देरी से शुरू हुई कथा में भक्तगण बड़ी संख्या में उपस्थित हुए।

भागवत कथा

लहार, गोरमी में कलश यात्रा के साथ श्रीमद््भागवत ज्ञान सप्ताह का आयोजन प्रारंभ

शिव-शक्ति रुद्र महायज्ञ प्रारंभ

गोरमी के मानहड़ गांव में वन खंडेश्वर महादेव मंदिर पर रविवार को 11 कुंडीय शिव-शक्ति रुद्र महायज्ञ प्रारंभ किया गया है। महायज्ञ से पूर्व श्रद्धालुओं ने गांव में कलश यात्रा निकाली। कलश यात्रा में परीक्षित बने अजबसिंह भदौरिया ने शिवमहापुराण की पुस्तक को सिर पर धारण कर विराजमान समस्त देवी-देवताओं को महायज्ञ में पधारने का निमंत्रण दिया। यात्रा में हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लेकर गांव भर में धर्म की पताका फहराई। प्रति दिन दोपहर एक बजे से यज्ञाचार्य सुरेश उपाध्याय के श्रीमुख से शिवमहापुराण की अमृतमयी कथा का रसपान भक्तों को कराया जाएगा। इसके बाद शाम चार बजे से वृंदावन धाम से आए कलाकारों द्वारा रासलीला का सुंदर मंचन किया जाएगा। श्री फक्कड़दास महाराज ने बताया हर साल यहां भव्य भागवत कथा का आयोजन होता है, किंतु यह महायज्ञ कई वर्षों के बाद हो रहा है, जो लोगों के लिए कल्याणकारी होगा।

कथा व्यास बोले- कल्याण के लिए ईश्वर में चित्त लगाएं

उधर मौ के कटरा मोहल्ला में चल रही श्रीमद भागवत कथा के छठवें दिन कथा व्यास महावीर दुबे शास्त्री ने बताया हमें जीवन के मोक्ष तक पहुंचना है तो ईश्वर में चित्त लगाना चाहिए। भगवान की भक्ति के लिए समय निर्धारित करने की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए व्यक्ति चलते-फिरते प्रभु का भजन कर सकते हैं। शास्त्री ने बताया देखा गया है कि व्यक्ति जीवनभर धर्म कार्य करने का सही समय तलाशता रहता है, परंतु वह इस समय की तलाश में अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच जाता है। इसलिए अपने व्यस्त जीवन से थोड़ा समय निकालकर धर्म कार्यों में देना चाहिए। क्योंकि जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए मनुष्य का जन्म हुआ है, वह अपने कर्म को भुला बैठता है और व्यर्थ के जंजाल में उलझ जाता है।

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