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कांग्रेस से टूटे भूपिंदर बने नगर परिषद के अकाली सीनियर उपप्रधान

डेढ़ महीने में दो बार ऐन मौके पर पोस्टपोन होने के बाद लालड़ू नगर परिषद के सीनियर उपप्रधान का चुनाव आखिरकार वीरवार को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 01, 2018, 02:15 AM IST

कांग्रेस से टूटे भूपिंदर बने नगर परिषद के अकाली सीनियर उपप्रधान
डेढ़ महीने में दो बार ऐन मौके पर पोस्टपोन होने के बाद लालड़ू नगर परिषद के सीनियर उपप्रधान का चुनाव आखिरकार वीरवार को कड़ी सुरक्षा व तनावपूर्ण माहौल के बीच शांतिपूर्ण ढंग से सिरे चढ़ गया। इसमें एनके शर्मा समर्थकों ने बाजी मारी और एमएलए समेत 9 पार्षदों का समर्थन लेकर भूपिंदर सिंह राठौड़ को सीनियर उपप्रधान बनाया गया। हालांकि एनके शर्मा गुट के गुरमीत सिंह डेहर को उपप्रधान भी बनाया गया, परंतु कन्वीनर एसडीएम परमजीत सिंह ने इसे मान्यता नहीं दी। इसी के साथ अज्ञातवास पर चल रहे शर्मा समर्थक पार्षद दो महीने बाद अपने घर लौट पाए, वहीं डेढ़ साल की उठापठक के बावजूद जीत में नाकाम रही कांग्रेस को सियासी फजीहत का सामना करना पड़ा।

एनके शर्मा ने बताया कि पार्षद बलकार रंगी द्वारा प्रपोज व पवन कुमार द्वारा तायद करने पर भूपिंदर राठौड़ को नगर परिषद लालड़ू का सीनियर उपप्रधान बनाया गया। एनके शर्मा के अनुसार ए क्लास कमेटी के कारण जूनियर उपप्रधान का चुनाव भी एक्ट के मुुताबिक जरूरी था। हालांकि उनकी ओर से गुरमीत सिंह डेहर को सुशील राणा द्वारा नाम प्रपोज और रघुबीर जुनेजा द्वारा तायद करने पर उपप्रधान बना दिया गया था परंतु कन्वीनर ने इसे मान्यता नहीं दी। उन्होंने कहा कि पुलिस, प्रशासन व सरकार की तमाम ज्यादतियों के बावजूद अकाली दल-भाजपा की जीत विरोधियों के लिए सबक है कि जोड़ने की राजनीति जोरशोर से नहीं बल्कि दिलों को जीत कर होती है।

कांग्रेस संभाल नहीं सकी, घर वापसी कर भूपिंदर बने उपप्रधान: हलके में जीरकपुर व डेराबस्सी के बजाय तख्तापलट के लिए लालड़ू नगर परिषद ज्यादा अासान लक्ष्य था, इसीलिए कांग्रेस द्वारा बीते सवा साल से लालड़ू नगर परिषद पर काबिज होने के लिए पाार्षदों की जोड़तोड़ जारी थी परंतु उसकी रणनीति फेल रही। जिस भूपिंदर को सीनियर उपप्रधान बनाया गया, वह एनके शर्मा खेमे से टूटकर कांग्रेस खेमे में जा मिले थे, परंतु कांग्रेस उसे अपने साथ जोड़े नहीं रख सकी और वह न केवल वापस एनके खेमे में वापिस लौट आए बल्कि सीनियर उपप्रधान भी बन बैठं। दूसरा, कांग्रेस समर्थक आठ पार्षद बैठक में आए भी परंतु न तो उन्होंनेे उपप्रधान के लिए अपना उम्मीदवार उतारा, न ही बैठक का बॉयकाट किया। इतना जरूर है कि उन्होंने चुनाव की प्रोसीिडंग्स पर हस्ताक्षर नहीं िकए।

दो महीने बेघर रहे पार्षद चुनाव के बाद घर लौटे

27 महीनों से लंबित सीनियर उपप्रधान चुनाव हाईकोर्ट में पिटीशन देने के बावजूद 16 अप्रैल और फिर 16 मई को ऐन मौके एसडीएम के अवकाश का हवाला देकर पोस्टपोन कर दिए गए थे। दोनों बार नदारद रहे कांग्रेस समर्थक पार्षद वीरवार को चुनाव में हिस्सा लेने आए। जोड़तोड़ से बचने के लिए अपने घरों से करीब दो महीने तक बेघर रहे अकाली पार्षदों को जीरकपुर से मीडिया व अकाली भाजपा समर्थकों की मौजूदगी में एनके शर्मा अपने साथ कड़ी सुरक्षा में लेकर सुबह करीब आठ बजे ही लालड़ू पहुंच गए, जबकि कांग्रेस समर्थक पार्षद ऐन मौके दस बजे नप कार्यालय पहुंचे। अकाली भाजपा और कांग्रेस के सैंकड़ों समर्थक मौके पर जमा हुए। चुनाव के बाद कांग्रेसी खिसकते गए और अकाली भाजपा समर्थकों ने एनके शर्मा के समर्थन में डटकर नारेबाजी की और बाद में लालडू मंडी में विजयी जलूस भी निकाला। कन्वीनर परमजीत सिंह ने बताया कि सीनियर उपप्रधान के तौर पर केवल भूपिंदर राठौड़ का चुनाव ही संपन्न हुअा है।

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