प्रपत्र क गठन के एक साल बाद भी कार्रवाई नहीं
तत्कालीन उपायुक्त प्रमोद कुमार गुप्ता द्वारा महुआडांड़ बीडीओ मो. अनीश के विरुद्ध गठित प्रपत्र क पर अबतक कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे भ्रष्टाचारमुक्त प्रशासन के दावे की पोल खुल गई है। दिलचस्प यह है कि मुख्यमंत्री जनसंवाद केंद्र में शिकायत संख्या 34273/2016 के आधार पर तत्कालीन उपायुक्त ने मामले की जांच कराई थी।
शिकायतकर्ता ने बताया था कि मनरेगा के तहत योजना संख्या 07/2015-16 आंगनबाड़ी केंद्र गया घाटी से लेकर दुर्गाबाड़ी तक मिट्टी-मोरम पथ निर्माण कार्य किया जाना था। जिसका प्राक्कलन राशि 4,86000 रुपए में से 4,19637 रुपए की निकासी कर ली गई है। शिकायत पत्र में कहा गया था कि योजना संख्या 01/2015-16 में आंगनबाड़ी केंद्र बराही से लेकर बैगा बगीचा तक मिट्टी-मोरम पथ निर्माण 4,86000 रुपए से कराया जाना था। जिसमें 4,66293 रुपए की अवैध राशि निकाल ली गई। इसी आरोप पर डीआरडीए निदेशक से जांच कराई गई। इस मनरेगा योजना में मजदूरों द्वारा कार्य नहीं कराकर जेसीबी मशीन से कार्य कराया गया। जिसमें रोजगार सेवक, पंचायत सेवक, कनीय अभियंता व बिचौलिया की संलिप्तता है। दोनों योजना का एफटीओ प्रखंड स्तर पर सृजित किया गया है तथा दोनों योजना में बीडीओ के द्वारा ही भुगतान भी किया गया है। डीआरडीए निदेशक के इसी रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन उपायुक्त ने बीडीओ के खिलाफ प्रपत्र क गठित कर सरकार को कार्रवाई के लिए भेजा था। जांच के क्रम में 5,61816 रुपए सरकारी राशि के गबन की पुष्टि हुई थी।
इस मामले में निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई तो हो गई, लेकिन बीडीओ अब भी अपने पद पर बने हुए हैं। गठित प्रपत्र क के साथ जांच रिपोर्ट, एमबी बुक, एफटीओ की अभिप्रमाणित छाया प्रति भी सरकार के ग्रामीण विकास विभाग को भेजी गई है। भ्रष्टाचार में संलिप्तता प्रमाणित होने के बाद भी बीडीओ पर कार्रवाई नहीं होना यहां चर्चा का विषय बना हुआ है।