ग्रामीणों की सहमति के बाद ही खाली होंगे लाटू व कुजरुम गांव : डीसी
ग्रामीणों की सहमति के बाद ही गारू प्रखंड के लाटू व कुजरुम गांव खाली कराए जाएंगे। यह फैसला उपायुक्त राजीव कुमार की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई बैठक में लिया गया है। उपायुक्त ने कहा है कि उनके सहमति के बाद ही वहां के ग्रामीण विस्थापित किए जाएंगे। इसपर डीएफओ महालिंगम ने कहा कि विस्थापित होनेवाले गांव के 18 वर्ष से अधिक उम्र के प्रत्येक व्यक्ति को दस-दस लाख रुपया मुआवजा राशि दिया जाएगा।
इसके अलावे उन्हें जमीन व अन्य सुविधाएं दी जाएगी। बैठक में मौजूद ग्रामीणों ने विस्थापन के पूर्व मुआवजा राशि व अन्य सभी सुविधाएं दिलाने की मांग की। उपायुक्त ने उन्हें भरोसा दिलाया कि जबतक सहमति नहीं बन जाती, तब तक आप ग्रामीणों को विस्थापित नहीं कराया जाएगा। उपायुक्त ने डीएफओ महालिंगम को ग्रामीणों के साथ बैठक करने समेत कई निर्देश दिए। बैठक में डीएफओ एम महालिंगम व वेदप्रकाश कंबोज के अलावे डीडीसी अनिल कुमार सिंह, एसी एनए बागे, आईटीडीए निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद, डीडब्ल्यूओ रमेश कुमार चौबे, एसीएफ मदनजीत सिंह, कुमार धर्मवीर समेत कई पदाधिकारी मौजूद थे।
लाटू व कुजरूम गांव के लोगों के साथ बैठक करते उपायुक्त।
पलामू व्याघ्र क्षेत्र में आने के कारण खाली हो रहा गांव
लाटू व कुजरुम गांव पलामू व्याघ्र क्षेत्र में है। वन्यप्राणियों के सुरक्षा व संरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने दोनों गांव खाली कराने का फैसला लिया है। पिछले दो साल से वनविभाग के अधिकारी ग्रामीणों के साथ बैठक कर सहमति बनाने में जुटे हैं। विस्थापन के पूर्व मुआवजा नहीं मिलने से ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े हुए हैं।
दोनों गांव में 489 लोग करते हैं निवास
जानकारी के अनुसार लाटू गांव में 206 व कुजरूम गांव में 281 लोग निवास करते हैं। दोनों गांव आदिवासी बहुल है। सभी के आय के स्रोत कृषि व वन उपज हैं। ग्रामीणों को डर है कि गांव छोडऩे के बाद मुआवजा मिलने में विलंब हुआ तो न घर के रहेंगे और न घाट के।