जिले में बीड़ी पत्ते के अवैध कारोबार पर रोक लगाने एवं श्रमिकों को उनका वाजिब मजदूरी दिलाने के लिए उपायुक्त राजीव कुमार व एसपी प्रशांत आनंद सख्त हो गए है। जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी बयान में बताया गया कि उपायुक्त व एसपी बीड़ी पत्ते के काली कमाई पर पैनी नजर रखे हुए हैं। अब बीड़ी पत्ते के अवैध कारोबार करनेवालों पर सीधी कार्रवाई होगी। इसके लिए जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन की आेर से कमेटी गठित की जाएगी, जिसमें वन विभाग के अधिकारियों को भी रखा जाएगा। कमेटी द्वारा जंगलों में हो रहे बीड़ी पत्ते की तोड़ाई पर नजर रखी जाएगी।
डीसी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र, उप स्वास्थ्य केंद्र समेत अन्य सरकारी भवनों का प्रयोग बीड़ी पत्ता रखने के लिए होता है तो संबंधित भवन के प्रभारी पर सीधी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने विभाग के वरीय अधिकारियों को भी यह सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं कि किसी भी कीमत पर सरकारी भवन का उपयोग बीड़ी पत्ता रखने के लिए नहीं हो।
लातेहार के ओरेया ग्राम में रघुनंदन सिंह से बीड़ी पत्ता के बारे में पूछताछ करते डीसी।
श्रमिकों को नहीं मिलता उचित मजदूरी
जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की ओर से यह भी बताया कि बीड़ी पत्ता की तोड़ाई करनेवाले श्रमिकों को उचित मजदूरी नहीं मिल पाता है। पिछले दिनों गारू प्रखंड के दौरे के क्रम में उपायुक्त के समक्ष ओरेया गांव में यह मामला संज्ञान में आया। उपायुक्त के पूछने पर रघुनंदन सिंह ने बताया कि अभी बीड़ी पत्ता तोड़ाई का काम चल रहा है। पूरे गांव के लोग इसमें जुटे हैं। कमाई के बावत पूछने पर उसने बताया गया कि १५ दिनों में तीन-चार हजार रुपए ही कमाई हो पाती है। कभी-कभी तो ठेकेदार पत्ते के पैसे भी नहीं देते। इसपर उपायुक्त ने जांच के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया।
बीड़ी पत्ता कारोबारियों लिए रेल मार्ग बना वरदान
इधर, सीआईसी सेक्शन का बरवाडीह-लातेहार रेल मार्ग बीड़ी पत्ता कारोबारियों लिए वरदान बन गया है। इस रेल मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों मजदूर लाखो रुपए के अवैध बीड़ी पत्ते लेकर लातेहार पहुंच रहे हैं। यह कारोबार रात के अंधेरे में फल-फुल रहा है। बताया जा रहा है कि मजदूर पलामू व्याघ्र परियोजना क्षेत्र के कोर एरिया से बड़े पैमाने पर अवैध बीड़ी पत्ते की तोड़ाई कर छिपादोहर स्टेशन पहुंचते हैं, जहां से देर शाम पैसेंजर ट्रेन या मालगाडिय़ों में लोड किया जाता है। लातेहार पहुंचने पर उसे मजदूरों द्वारा ठेकेदारों के ठिकानों पर पहुंचाया जाता है।