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विद्यार्थियों को मनाकर लाना पड़ रहा है स्कूल लोगांे को प्रेरणा देने के लिए लिख रहे स्लोशन
लटेरी| दो अप्रैल से शुरू हुए नए शैक्षणिक सत्र में अनेक स्थानों पर ,शादी विवाह व स्थानीय परिस्थितियों के चलते छात्र उपस्थिति अत्यंत कम मिल रही है। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों ने शिक्षकों को निर्दिष्ट किया है कि शाला प्रबंधन समिति, गांव के प्रबुद्धजनों, जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर लोगों के घर जाकर, पालक संपर्क कर विद्यार्थियों को विद्यालय लाए। जिससे जाॅय फुल लर्निंग के तहत खेल- खेल में उन्हें शिक्षा प्रदान की जा सके। शिक्षक अपने स्तर पर छात्रों को आकृष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। इसी क्रम में मुरारिया के शिक्षक शैलेश जैन ने लोगों को प्रेरित करने के लिए गांव में दीवारों पर स्कूल चले हम अभियान से संबद्ध स्लोगन स्वयं अपने हाथों से लिखे।
वाकई विकास खंड अंतर्गत शिक्षकों के प्रयास सराहना योग्य हैं। लोगों को चाहिए कि वह भी बढ़ चढ़कर शिक्षकों को सहयोग करें। अपने नन्हे मुन्नों को विद्यालय भेजें और सभी मिलकर एक कदम साक्षरता की ओर बढाएं। इस संबंध में बीआरसी लक्ष्मणसिंह यादव ने बताया कि नए शैक्षणिक सत्र में जाॅय फुल लर्निंग पैटर्न पर खेल- खेल में छात्रों को शिक्षा प्रदान करने के लिए विभिन्न गतिविधियां शाला स्तर पर कराई जा रही हैं।
क्षेत्रांतर्गत शिक्षक साथियों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। शैलेश ने लोगों को प्रेरित करने यह तरीका अपनाया है कि ताकि वे ज्यादा से ज्यादा संख्या में बच्चों को विद्यालय भेजे। स्वयं दीवार लेखन किया। यह इसका जीवंत उदाहरण है। उनका यह प्रयास सराहनीय है।