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स्कूलों में छात्रों की कम उपस्थिति बनी परेशानी

3 वर्ष पहले
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नए शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ शालाओं में जहां एक ओर विद्यार्थियों के लिए आनंददायी वातावरण प्रदान कर रहा है, वहीं शिक्षक- शिक्षिकाओं के लिए समस्या भी बन कर आया है। स्कूलों में नए रोचक तरीकों से आनंददायी वातावरण में शिक्षा प्रदान की जा रही है। कुछ शालाओं में शिक्षक भी जॉय फुल लर्निंग पैटर्न पर काफी उत्साह से काम कर रहे हैं। पर परीक्षा के बाद बिना गेप तत्काल ही 2 अप्रैल से स्कूल खुल जाने के कारण अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रीय शालाओं में छात्रों की उपस्थिति नगण्य बनी हुई है।

पूर्व में ग्रीष्मकाल में विद्यालयों में अवकाश रहता था। अधिकतर बच्चे नाना - नानी, चाचा - चाची, मामा - मामी, दादा - दादी के घर अपने परिजनों के साथ रहने मस्ती करने, गर्मियां बिताने निकल गए हैं तो कुछ शादी - विवाह में परिजनों के साथ आ - जा रहे हैं। कुछ स्थानों पर मजबूरी के चलते उदर पोषण के लिए महुआ आदि वनोपजों को बीनने, संग्रहित करने प्रातः काल ही निकल जाते हैं। जिससे वर्तमान में विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति अत्यंत कम मिल रही है।

भास्कर की टीम ने लटेरी विकास खंड के 34 गांवों में जाकर वहां की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया तो विद्यालयों में उपस्थिति दर्ज संख्या के हिसाब से मात्र दस प्रतिशत ही मिली। पालकों मांगीलाल भील, मिश्रीलाल भील, श्यामलाल भील, रोडजी भिलाला, हरिराम अहिरवार, संतोष नामदेव, विनोद वंशकार, जगदीश बंजारा आदि से चर्चा में स्पष्ट हुआ बच्चे शादी - विवाह व रिश्तेदारी में गए हैं इसलिए स्कूल नहीं पहुंच रहे हैं। यह समय गर्मी की छुट्टी का है। जैसे ही लौटेंगे हम उनको जरूर भेजेंगे।

जब भास्कर की टीम सुबह 09:30 बजे प्राथमिक शाला नेवली पहुंची तो वहां जनशिक्षक राकेश अग्रवाल विद्यालय में मौजूद थे। दर्ज 110 छात्रों में से 20 छात्र भी।उपस्थित शिक्षकों विनोद श्रीवास्तव व चिरोंजीलाल समरवार के साथ लर्निंग गतिविधि कर रहे थे। अन्य स्टाफ के विषय में पूछा तो ज्ञात हुआ कि, विद्यालय की 3 शिक्षिकाएं अंगूरी कुशवाहा, सुरेखा साहू, शारदा अहिरवार 8 बजे ही गांव में बच्चों को लेने के लिए निकल गई हैं। आती ही होंगी। करीब 5 मिनट बाद शिक्षिकाएं विद्यालय वापस लौटी। उनके साथ लगभग 20 छात्र- छात्राएं भी थी। वे आकर विद्यालय का संचालन करने लगी । जब शिक्षिकाओं से इस संबंध में बातचीत की गई तो उनका कहना था कि, यह हमारा रोज का काम है। स्कूल आकर विद्यालय से 1- 2 लोगों को गांव में जाना पड़ता है तब कहीं जाकर इतने बच्चे एकत्रित कर पाते हैं। यदि हम ऐसा ना करें तो जो भी अधिकारी आता है वह हम पर कार्रवाई करने के लिए तैयार रहता है। क्या करें नौकरी करनी है तो सब करना पड़ेगा।

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