आर्य वीर दल झारखंड प्रदेश के बैनर तले चल रहे युवा चरित्र निर्माण शिविर में युवा चेतना शिविर के तीसरे दिन रविवार को भी कई कार्यक्रम हुए। आर्य वीर दल के महामंत्री गणेश कुमार शास्त्री ने कहा विद्यार्थियों का मुख्य कर्तव्य विद्या प्राप्ति है। विद्या प्राप्ति के लिए चित्त की एकाग्रता अति आवश्यक है। चित्त की एकाग्रता गायत्री मंत्र के जाप से होती है। महामंत्र गायत्री के जाप करने से बौद्धिक क्षमता बढ़ती है। प्रत्येक विद्यार्थी को प्रातः नित्यप्रति 10:15 मिनट गायत्री मंत्र का हर रोज जाप करना चाहिए। आज सारी दुनिया अशांत है, भ्रमित है, उस सब का मूल कारण आध्यात्मिक विद्या से दूर होना है। आज हमारे विद्यालय में मैकाले की शिक्षा व्यवस्था प्रचलित है। जिसमें आध्यात्मिकता का कोई स्थान नहीं है और आध्यात्मिकता के अभाव में पढ़ा-लिखा युवा वर्ग भी मार्ग से भटक जाता है। इससे पूर्व डॉ जीतू जितेंद्र मेहर की अगुवाई में हवन संध्या प्रातः प्रशिक्षणार्थियों के बीच किया गया एवं आज का सत्र प्रारंभ किया गया। विभिन्न विधाएं संतोष नैष्ठिक, महादेव आर्य, नूतन आर्य, देव आर्य, अर्जुन देव आर्य, दीपक आर्य, सियाराम आर्य, ओमकार आर्य, योगेंद्र आर्य, योगेश प्रजापति, अभय भारती के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। आसन स्तूप, दण्ड, लाठी चालन, प्राणायाम, सर्वांग सुंदर व्यायाम, सूर्य नमस्कार, भूमि नमस्कार का अभ्यास शिक्षार्थियों को कराया गया।