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जिले में हो ट्रॉमा सेंटर तो बच सकती हैं कितनी जानें

3 वर्ष पहले
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ओटी में अप्रशिक्षित कर्मी लगाते हैं टांका और करते हैं मरहम-पट्‌टी

ट्रामा सेंटर स्थापित करने की है लोगों की मांग

भास्कर न्यूज|लोहरदगा

लोहरदगा सदर अस्पताल अब भी गंभीर घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के मामले में अपंग साबित हो रहा है। जिले में बाइपास सड़क के निर्माण में तत्परता नहीं दिखाए जाने और सदर अस्पताल में बेहतर यंत्रों का अभाव होने के कारण अब भी गंभीर मरीजों को रिम्स भेजने की परंपरा कायम है। बाइपास सड़क का निर्माण नहीं होने के कारण मुख्य पथ पर बड़े वाहनों का आवागमन भारी संख्या में होता है। जिससे छोटे वाहन चालकों को इसका भुक्तभोगी बनना पड़ता है। वहीं मुख्य पथ में सड़क के किनारे पेड़ों के निकले बड़े-बड़े साख व बिजली के जर्जर पोल अब भी कई जगहों पर दुर्घटना को आमंत्रण दे रहे हैं। 18 मई को एक सड़क दुर्घटना में शहर के समाजसेवी प्रमोद विश्वकर्मा की मौत हो गई थी। जिसके बाद रविवार सुबह खुशी की बात करने आ रहे एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई। जिससे खुशी गम में तब्दील हो गई। अब भी कहीं ना कहीं घटना में गई लोगों की जानें सदर अस्पताल की अव्यवस्था व बाईपास सड़क का निर्माण नहीं होना कारण है।

लोहरदगा में गंभीर मरीज हो या साधारण घायल सभी को प्राथमिक चिकित्सा करने अप्रशिक्षित चिकित्सा कर्मी अधिक दिखायी पड़ते हैं। ओटी में एक नर्स होती है बाकी सब अस्पताल के सामान्य कर्मी मरहम पट्‌टी में जुट जाते हैं। गंभीर मरीज को प्राथमिक इलाज के बाद रिम्स रेफर कर दिया जाता है। तब गंभीर को रांची ले जाने में 2 घंटे लगते हैं। इस बीच जिस घायल को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने का समय होता है, तब वह रांची तक का सफर तय करता है, जिसके कारण कइयों की जानें चली जाती हैं। सदर अस्पताल सही मायने में देखा जाए तो अब भी आधुनिक समय के अनुसार सुविधाविहीन साबित हो रहा है। रविवार को कुडू के चिरी चौक के समीप हुए घटना में मारे गए लोगों की सूचना पर स्थानीय लोगों में रोष देखने को मिला।

सभी सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से अस्पताल को कोसते नजर आए। कइयों ने सदर अस्पताल में ट्रामा सेंटर स्थापित कराने की मांग की। जिससे किसी की मौत दुर्घटना से ना हो सके। सदर अस्पताल में प्रतिदिन दिनभर में कम से कम दो लोगों को रिम्स भेजना परंपरा बन गयी है। सदर अस्पताल सिर्फ प्राथमिक चिकित्सा के नाम पर ही जाना जाने लगा है।

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