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बिना सुर ताल के जिंदगी अधूरी : आदित्य

3 वर्ष पहले
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आर्टिस्ट हमेशा अपने कला के दम पर लोगों के दिलों में बसते हैं। कड़ी मेहनत और लगन के बिना सफलता पाना असंभव है। कलाकार के लिए जगह मायने नहीं रखती कि वह गांव का है या शहर, बल्कि यह मायने रखती है कि वे अपनी कला से लोगों का कितना मनोरंजन कर सकते हैं।

यह बातें लोहरदगा स्थापना दिवस समारोह में अपनी कला का जादू बिखेरने पहुंचे बॉलीवुड के जाने माने संगीतकार पद्मभूषण सम्मानित उदित नारायण के बेटे बॉलीवुड कलाकार सह संगीतकार आदित्य नारायण ने विशेष बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि वे पहली बार लोहरदगा आए हैं। इससे पहले लोहरदगा का नाम भी नहीं सुना था। परंतु उनके पिता एक बार लोहरदगा आ चुके हैं। उनके दादा एक किसान थे। जिनके बाद उनके पिता ने संगीत के क्षेत्र में एक जुनून के साथ कार्य कर उपलब्धी हासिल की। आज वे खुद अपने पिता से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

बिना सुर ताल के जिंदगी अधूरी है। कहा आज देश के हर कोने से एक से बढ़कर कलाकार विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे है। जिसमें झारखंड के भी कई कलाकार है। कहा लोहरदगा की जनता में संगीत के प्रति काफी विश्वास देखने को मिला है।

आदित्य नारायण।

कला में करियर बना सकते हैं युवा

उन्होंने बताया कि लोहरदगा आकर उन्हें लोगों का भरपूर प्यार मिला है। वे आगे भी मौका मिलने पर लोहरदगा आने की चाह रखते हैं। डीजे के दौर में भी लोग सुर ताल के सही संगम के दीवाने हैं। उन्होंने बताया बॉलीवुड में कई बड़े-बड़े संगीतज्ञ हैं। जिनसे प्रेरणा लेकर छोटे से छोटे गांव के युवक व युवती अपना करियर कला जगत बेहतर बना सकते हैं। अंत में उन्होंने बताया कि उन्होंने सापित, परदेश, जब प्यार किसी से होता है, रू ब रू, गोलियों की रासलीला राम लीला, दिलजले, ताल, बीवी नंबर वन, राजा की आएगी बारात सहित कई फिल्मों को किरदार निभाया है। इसके अलावा कई फिल्मों में उन्होंने अपनी आवाज भी दी है।

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