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सड़क हादसे में पांच माह में 237 की मौत सदर अस्पताल में इलाज के दौरान 117 जानें गईं

3 वर्ष पहले
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जहां झारखंड में स्वास्थ्य मंत्री राम चंद्र चंद्रवंशी स्वास्थ्य सुविधाओं की घोषणा कर रहें हैं। वहीं लोहरदगा सदर अस्पताल उनकी घोषणाओं से अछूता रह गया है। जिले में प्राइवेट सहित सरकारी अस्पतालों में अबतक आईसीयू सहित अन्य स्पेशलिस्ट चिकित्सकों के साथ यंत्रों की भारी कमी है। किसी भी व्यक्ति को हल्की खरोंच भी आई तो उसे दो घंटे का दर्द भरा सफर तय करना पड़ता है। सदर अस्पताल में अव्यवस्थाओं के आलम के बीच बीते पांच माह में 237 जानें जा चुकी हैं। यहां न तो कोई हड्डी स्पेशलिस्ट हैं और न ही हाई टेक्नोलॉजी यंत्र है। सदर अस्पताल में आने वाले ज्यादातर दुर्घटनाओं के मामले व्यवस्था की कमी के कारण रांची रिम्स रेफर किए जाते हैं।

सदर अस्पताल में न पर्याप्त मात्रा में चिकित्सक हैं और न ही एंबुलेंस व प्रशिक्षु मेडिकल स्टॉफ। पिछले कुछ वर्षों से लोहरदगा झारखंड में दुर्घटनाओं के मामले पर पहले स्थान पर आने की दौड़ में शामिल हो गया है। यहां होने वाली लगभग घटनाओं में घायल मरीजों की मौत सुनिश्चित मानी जाती है। कुल मिलाकर सदर अस्पताल में अब भी चिकित्सकों से लेकर आधुनिक तकनीकी वाले यंत्रों की भारी कमी है। जिसके कारण आए दिन दुर्घटना सहित अन्य मरीजों की जान बचाने में अस्पताल असफल रहता है।

इधर राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई 108 एंबुलेंस सेवा का जिले में व्यापक असर देखा जा रहा है। जबसे 108 एंबुलेंस सेवा की शुरुआत की गई है तब से दुर्घटनाओं में घायलों को घटना स्थल से सदर अस्पताल लाने व अस्पताल से रिम्स रेफर किए जाने तक में अहम भूमिका निभा रही है। सिविल सर्जन डॉ पैट्रिक टेटे का कहना है कि सदर अस्पताल में वर्तमान में 3 एंबुलेंस है तथा जिले में 108 की चार एंबुलेंस है । इसे जिले के किस्को, कुडू, भंडरा व एक 108 एंबुलेंस को सदर अस्पताल में रखा गया है।

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