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एटीआर में करोड़ों खर्च कर लगाए गए सोलर संयत्र मेंटेनेंस नहीं होने से ठप, लोग परेशान

3 वर्ष पहले
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सरकार के प्रयास से एटीआर के विभिन्न गांवों में करोड़ों रुपए के सोलर संयंत्र लगाए गए हंै। जिससे वनवासियों को बिजली मिल सके। लेकिन क्रेडा अधिकारियों की उपेक्षा के चलते वनांचल में स्थित लगभग 12-15 गांव के सोलर प्लांट या तो बंद है या फिर जो चालू हैं वह कुछ समय के लिए ही बिजली दे पा रहे हैं।

इन सोलर पंप के बंद होने से बैगा आदिवासियों को बिजली नहीं मिल पा रही है। साथ ही संयंत्र से चलने वाले वाटर पंप भी बंद हो गए हैं जिससे पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि प्लांट में बैट्री व पेल्ट खराब हो चुका है जिसके चलते क्षमता में कमी आ गई है। इसे बनवाने के लिए दर्जनों बार अधिकारियों को शिकायत कर चुके हैं लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।

वनवासियों ने बताया कि शासन द्वारा वन क्षेत्र में सौर ऊर्जा तो लगवा दिए गए हैं लेकिन मेंटनेंस की व्यवस्था के लिए पर्याप्त सामग्री की व्यवस्था नहीं की गई है, जिसके चलते यदि छोटी मोटी खराबी भी आ गई तो बनने में महीनों लग जा रहे हैं। राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण क्रेडा द्वारा लोरमी क्षेत्र के एटीआर एवं बाहरी क्षेत्र के ग्राम जाकड़बांधा, अचानकमार, बिंदावल, छपरवा, लमनी, सुरही, कटामी, निवासखार, महामाई, बम्हनी, रजंकी, सारसडोल, बिजराकछार, महुआमाचा, पटपरहा, बोईरहा, राजक, डंगनिया, घमेरी, मंजुरहा सहित और भी अनेक ग्रामों में करोड़ों रुपए की लागत से सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित किए गए हैं।

क्षेत्र में शासन की वनवासियों को बिजली देने की महत्वकांक्षी योजना है। वर्तमान समय में बिजली मिलना तो दूर कई ग्रामों में रौशनी नहीं मिल रही है। कारण सिर्फ एक है कि सौर ऊर्जा संयंत्र बिगड़ा पड़ा हुआ है। जिसे चलाने के लिए क्रेडा अधिकारी उदासीन नजर आ रहे हैं। प्लांट को बनवाने या फिर बदलने की मांग को लेकर वनवासी अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन उनकी समस्या सुनने वाला कोई नहीं है। इसे लेकर ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ते जा रहा है।

औरापानी का सोलर संयत्र दस दिनों से खराब

रेस्ट हाउस के नीचे लगे सोलर संयत्र पिछले दस दिनों से ठप है। जिसके चलते औरापानी में रहने वाले वनवासी अंधेरे में जीवन यापन करने मजबूर हैं। इसको सुधारने के लिए ग्रामीण कई बार अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। वहीं इसमें लगे सामाग्री भी देख रेख के अभाव में जीर्ण शीर्ण हो चुके हंै जिसके चलते संयत्र बंद हैं। इन्हीं सब कारण से ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। मामले में संबंधित अधिकारी से जानकारी लेने की कोशिश की गई पर उनसे संपर्क नहीं हो सका।

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