घर के आसपास का माहौल ऑक्सीजन से भरपूर रखने को ज्यादातर महिलाएं गार्डनिंग करती हैं, पिछले कुछ सालों में खासकर शहरी महिलाआें में किचन गार्डन का रुझान बढ़ा है। दरअसल सब्जियां और फल महंगे होने के साथ इनमें मिलावट के मद्देनजर किचन गार्डनिंग का ट्रेंड बढ़ रहा है। घर के एक कोने, गमलों या फिर गार्डन के हिस्से का सदुपयोग कर किचन गार्डन डेवलप करना आसान है। इनसे केमिकल फ्री ताजी सब्जियां और फल मिलते हैं, जो पूरी फैमिली को हेल्दी लाइफ देते हैं। इतना ही नहीं इस दिशा में काम कर रही एक संस्था ने भी शहर के लोगों को ट्रेनिंग देने के लिए मुहिम चला रखी है।
शहर में किचन गार्डन का बढ़ रहा क्रेज, संस्थाएं भी वर्कशॉप लगा महिलाओं को दे रहीं हैं ट्रेनिंग
तनाव से मिलती है मुक्ति
बसंत विहार की सुमनजीत कौर ने बताया कि उनको गार्डनिंग कर प्लांट्स के साथ बातें करना पसंद है। अंगूर, अनार, किन्नू, मौसमी, नींबू, बैंगन, शिमला मिर्च, ककड़ी, भिंडी, तुरई जैसी चीजें घर पर ही उगा लेती हैं। इसके लिए वे दूसरों को भी मोटिवेट करती हैं। घर में गार्डन होने से तनाव से मुक्ति भी मिलती है। दरअसल इससे दिमाग अच्छे काम में लगा रहता है। इधर-उधर की फालतू बातें सोचने का वक्त ही नहीं मिलता है। सुमनजीत ने एक चरदी कला क्लब भी खोल रखा है, जिसमें मंथली गेट टूगेदर में प्रोडक्टिव टॉक कराती हैं।
फैमिली को दी हेल्दी लाइफ
अर्बन विहार की अंजू बग्गा कहती हैं कि बॉटनी की स्टूडेंट थीं तो प्लांट्स से पहले से ही लगाव था। पिछले कुछ सालों से पेस्टीसाइड फूड की वजह से बढ़ रही बीमारियों को लेकर काफी चिंतित थी। फिर सोचा कि अगर फैमिली को हेल्दी लाइफ देनी है तो मुझे उनको पेस्टीसाइड फूड से दूर रहना होगा। तीन साल पहले किचन गार्डन बनाया। घर में सब्जियां और फलों की पैदावार देख बच्चों में भी जिज्ञासा होती है और वे हरी सब्जियां खुश होकर खाते हैं।
बजट भी हुआ मेनटेंन
अग्र नगर की रहने वाली कमल ने बताया कि गार्डनिंग का शौक था, तो पहले कुछ प्लांट्स से शुरुआत की। इसके बाद किचन गार्डन बना लिया। अब घर पर ही फल व सब्जियां उगाती हूं। इस तरह टाइम भी यूटीलाइज करती हूं। बाजारु सब्जियां बासी होने के साथ ही कैमिकल्स वाली होती हैं। उनको उगाने या स्टोर करने के लिए कई तरह की चीजें इस्तेमाल होती हैं। ऐसे में घर की किचन गार्डन से ताजी व हेल्दी सब्जियों के साथ ही बजट भी मेंटेन रहता है।
ग्रो योर ऑन फूड पर वर्कशॉप
ईको सिख संस्था केयर फॉर नेचर केयर फॉर ऑल के साउथ एशिया के प्रोजेक्ट मैनेजर रवनीत सिंह ने बताया कि संस्था का मकसद लोगों को अवेयर करना है। इसके लिए कई टीमें बनी हैं। पंजाब में ओबेसिटी, हाई ब्लड प्रेशर, थायरॉयड हारमोनल डिसऑर्डर व डायबिटीज जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं। इनका सीधा असर हमारी डाइट से है। इसीलिए संस्था ग्रो योर ऑन फूड मुहिम चला रही है। संस्था की वुमन विंग वर्कशॉप के जरिए लेडीज को ट्रेनिंग देती हैं। इसमें घर में ही ऑर्गेनिक फ्रूट और वेजिटेबल्स ग्रो करने के साथ ही उसकी देखभाल व कीड़ों से बचाव संबंधी टिप्स दिए जाते हैं। घरों में होने वाली किटी पार्टीज में भी इस तरह की वर्कशॉप कराते हैं। लेडीज भी चाहती हैं कि फन के साथ यह पार्टी उनके लिए ज्यादा फायदेमंद हो सके।