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नगर निगम के 300 से ज्यादा मुलाजिमों ने कैश वसूली की 21 हजार रसीदों का नहीं दिया हिसाब

3 वर्ष पहले
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मनीष शर्मा | लुधियाना

नगर निगम के 300 से ज्यादा मुलाजिमों और कई ब्रांचों ने कैश कलेक्शन के लिए मिलीं 422 रसीद बुकों (जी-8) का हिसाब-किताब नहीं दिया है। इनमें कुल 21,100 रसीदें थीं। ये रसीदें 1991-92 से 2017 के बीच इश्यू की गई थीं। इनके जरिए कितनी आमदनी हुई और वह निगम के खाते में जमा हुई या नहीं, कुछ भी क्लीयर नहीं है।

दरअसल, यह गड़बड़ी तब सामने आई जब ऑडिट विंग ने रिकॉर्ड मांगा। विंग के पास ये रसीद बुकें पेश नहीं की गईं। ऑडिट विंग ने 26 सालों से पेंडिंग इन रसीद बुकों को गंभीर लापरवाही बताते हुए गबन की आशंका जताई है। उन्होंने निगम कमिश्नर को इनकम की पड़ताल न कराने के बारे में सूचित करते हुए बिना देरी के ये रिकॉर्ड ऑडिट विंग को भेजने के लिए कहा है।

एक रसीद हजार रुपए की काटी जा सकती है और एक करोड़ रुपए की भी; कैश कलेक्शन इन रसीदों के जरिए ही होता है, कितनी रसीदें काटी गईं और कितनी रकम निगम में जमा की गई, कुछ पता नहीं
निगम में सभी तरह की फीस, बिल, टैक्स वसूलने को जी-8 रसीद बुक निगम में सरकारी कैश लेने के लिए जी-8 रसीद बुक प्रयोग होती है। इसमें बिल्डिंग ब्रांच से जुड़ी बिल्डिंग एप्लीकेशन फीस, कंपोजीशन फीस, सीएलयू, प्रॉपर्टी टैक्स, पानी-सीवरेज बिल, एडवरटाइजमेंट टैक्स, तहबाजारी फीस समेत लगभग सभी तरह के चार्जेस शामिल हैं। बुक भरने के बाद उसे हेडक्वार्टर में जमा कर नई इश्यू कराई जाती है। फिर यह बुक निगम के ही ऑडिट विंग के पास जाती है। काटी गई रसीदों से कितनी इनकम आई और कितनी निगम के अकाउंट में जमा हुई, यह ऑडिट से ही क्लियर होता है। वहीं, प्रति रसीद कोई अमाउंट फिक्स नहीं है। एक रसीद हजार रुपए की भी काटी जा सकती है और एक करोड़ की भी। ऐसे में 21 हजार से ज्यादा रसीदों का रिकॉर्ड न मिलने पर ऑडिट विंग ने गबन की आशंका जताई है। ये रिकॉर्ड पिछले 26 सालों से पेंडिंग हैं, लेकिन अभी तक यह रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है।

गड़बड़ी करने वालों पर एक्शन हो

बहुत गंभीर मामला है। ऑडिट विंग ने आरटीआई में जानकारी दी है तो निगम अफसरों को भी इसके बारे में पता है। ऐसे में गड़बड़ी करने वाले मुलाजिमों पर एक्शन होना चाहिए। ताकि वह रसीदें जमा कराएं ताकि उनका ऑडिट हो सके। -रोहित सभ्रवाल, प्रेजिडेंट, कौंसिल ऑफ आरटीआई एक्टिविस्ट

पुरानी जमा कराए बिना नई इश्यू करने वालों की भूमिका भी शक के घेरे में : नियमानुसार कैश कलेक्शन की बुकें भरने पर उसे जमा करने के बाद ही नई बुक इश्यू की जाती है। बिना पुरानी बुक जमा कराए नई बुक इश्यू करने वालों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। वहीं इस मामले में संलिप्त 300 से ज्यादा मुलाजिमों में से 5 रिटायर हो चुके हैं लेकिन बाकी अभी भी नौकरी कर रहे हैं।

1991 से 2017 तक इश्यू की रसीदें, 26 सालों से ऑडिट को नहीं सौंपी
चेक कराऊंगा, कोई भी नहीं बचेगा

अगर इतनी जी-8 बुकों का रिकॉर्ड ऑडिट को नहीं मिला तो मैं इसको चेक कराऊंगा। हिसाब नहीं दिया गया तो मुलाजिमों पर एक्शन लेंगे। रिटायर हो चुके हैं, उन्हें पेंशन तो मिलती ही है। गड़बड़ी करने वाला कोई भी कार्रवाई से नहीं बचेगा। -जसकिरन सिंह, निगम कमिश्नर।

जोन बी में सबसे ज्यादा रसीदें जमा नहीं कराई गईं, 5 मुलाजिम हो चुके रिटायर
भास्कर के पास ऐसे मुलाजिमों की लिस्ट है जिन्होंने कई सालों से रसीद बुकें नहीं जमा कराई है। इनमें सबसे ज्यादा मुलाजिम और ब्रांचें निगम के जोन बसे हैं। इस जोन से 167 रसीद बुकें ऑडिट के लिए जमा नहीं कराई गईं। इसके बाद जोन ए में 122 रसीद बुकें ऑडिट को नहीं भेजी गईं। 102 रसीद बुकों के साथ जोन डी तीसरे व 14 रसीद बुकों के के साथ जोन सी चौथे नंबर पर है। यही नहीं, चुंगी कलेक्शन के लिए जारी होने वाली आर-4 रसीद बुकें भी ऑडिट के लिए नहीं भेजी गई। जबकि, चुंगी खत्म हुए 10 साल से ज्यादा बीत चुके हैं। ऐसी 17 रसीद बुकें साल 2001 से 2009 के बीच इश्यू की गई थीं। वहीं, इस सूची में 5 मुलाजिम ऐसे भी हैं, जो अब रिटायर हो चुके हैं, लेकिन उन्होंने रसीद बुकें जमा नहीं कराईं।

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