मुल्क बंटा मगर संत राम जैसे फनकारों की रगों में बसे सभ्याचार के रंगों ने बैसाखी के जरिए बिखेरे खुशहाली के रंग
मुंबई जाकर बरसों लगाए बैसाखी मेले, जुटते थे फिल्मी सितारे
धार्मिक, आर्थिक और सभ्याचारक महत्व के चलते बैसाखी है खास
पंजाबी विरसे की भी खास पहचान है खुशियों वाला त्योहार बैसाखी। जश्न का कोई मौका न चूकने वाले पंजाबियों ने बैसाखी में इसके धार्मिक, आर्थिक और सभ्याचारक महत्व के रंग भरे तो यह खुशियों के रंगों वाला त्योहार बन गया। खासकर इसके पंजाबी सभ्याचार के रंग ने गीत-संगीत की लय से सरहदों के पार पहचान बनाई। कनाडा, अमेरिका समेत जिन मुल्कों में पंजाबी जा बसे, वहां भी बैसाखी की धूम देखने लायक होती है। गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की सृजना कर सैकड़ों बरस पहले जो अनमोल धार्मिक विरासत सौंपी, उसे इस दिन पूरी श्रद्धा से याद किया जाता है। इसी मौके पर किसान फसल तैयार होने की खुशी में अपनी मेहनत के फल मिलने का जश्न मनाता है, यह इसका आर्थिक पहलू है। वहीं खासकर पंजाबियों की नसों में दौड़ते खून के साथ रची-बसी कला भी गीत-संगीत के जरिए इस मौके पर खुशियों का इंद्रधनुष तैयार करती है।
-(जैसा कि साहित्य-कला के क्षेत्र में खास पहचान रखने वाले कवि सवर्णजीत सवि और सतीश गुलाटी ने बताया)