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कारोबारियों के 3 महीने के हजारों बिलों का डिफरेंस हाेगा दुरुस्त

3 वर्ष पहले
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पावरकॉम ने अपने सॉफ्टवेयर में संशोधन कर लिया है। इससे कारोबारियों के पिछले तीन महीने के हजारों बिलों का डिफरेंस दुरुस्त हो जाएगा और बकाया अमाउंट अगले बिलों में एडजेस्ट हो जाएगी। यह पुष्टि चीफ इंजीनियर परमजीत सिंह ने की। उन्होंने बताया कि सॉफ्टवेयर अपग्रेड होने से कारोबारियों के करीब 1500 बिलों की एडजस्टमेंट होना तय है।

बता दें कि दिसंबर 2017 को मोहाली में कारोबारियों की तत्कालीन पावर मंत्री राणा गुरजीत सिंह से हुई मीटिंग में फैसला हुआ था कि टू-पार्ट टैरिफ एमओआर (मैक्सिमम ओवरऑल रेट) के तहत बिजली की खपत कम होने पर भी बिजली सात रुपए प्रति यूनिट से ज्यादा नहीं पड़नी थी। इससे बंद पड़े यूनिटों के लिए एमएमसी(मंथली मिनिमम चार्ज) लगाने पर भी सहमति बनी थी, लेकिन पावरकॉम ने इस समझौते को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। हालांकि इस बारे में 11 जनवरी को पावरकॉम ने नोटिफिकेशन भी जारी किया था, लेकिन इसके बारे में पब्लिक को नहीं बताया था।

फोपसिया की ओर से ये मामला विधानसभा में उठाए जाने के बाद पावरकॉम ने 28 मार्च को दबाव में नोटिफिकेशन बाहर निकाल तर्क दिया कि इस बारे में पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन के फैसले का इंतजार किया जा रहा था। पावरकॉम को यह भी बनाता पड़ा कि एमओआर लागू है और कारोबारियों को बिजली महंगी नहीं मिल रही है। इतना ही नहीं हरकत में आए पावरकॉम ने आदेश जारी कर दिए कि कारोबारी बिजली दफ्तरों में जाकर अपने बिल ठीक करवा सकते हैं।

फोपसिया प्रेसिडेंट बदीश जिंदल ने कहा कि अब सरकार अपना इंडस्ट्री को 5 रुपए प्रति यूनिट बिजली देने का वादा भी पूरा करे। उन्होंने बताया कि कारोबारियों को एमओआर के तहत भी बिजली 6.50 रुपए प्रति यूनिट पड़ रही है।

पांच रुपए बिजली देने का वादा भी पूरा करे सरकार
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