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‘कोई विरला ही है जो प्रभु को जानने के लिए उससे प्यार करता है’

3 वर्ष पहले
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रुहानी सत्संग प्रेम समाज की ओर से लाडोवाल स्थित इक जोत सत्संग घर में रुहानी सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में कमलबीर जी महाराज ने प्रवचनों में फरमाया कि हमारा जीवन अनमोल है। इसे व्यर्थ में ना गंवा कर प्रभु भक्ति में लगाना चाहिए।

आम इंसान सिर्फ अपनी आवश्यकताओं और इच्छाओं की पूर्ति के लिए भगवान को याद करता है। आश्यकताएं और इच्छाएं पूरी हो जाती हैं, परन्तु भगवान से संपर्क नहीं हो पाता। क्योंकि हमारी पहुंच भगवान तक न होकर केवल पदार्थ तक ही होती है। कोई विरला ही होता है जो अपने आपको जानने या प्रभु को जानने के लिए उससे प्यार करता है। लोग भौतिक पदार्थों में सुख ढूंढते हैं और इसके लिए भाग दौड़ करते हंै। जबकि इनमें सुख नहीं है। जब कभी हमें सौभाग्य से महापुरुषों की संगत का सुअवसर मिलता है तो हमें जीवन के भेदों का ज्ञान होता है। महापुरुष हमें हमारा मूल बता कर उससे जुडऩे की युक्ति बताते हंै और उनके बताए रास्ते पर चल कर ही हम अपने मूल के साथ मिल सकते हैंं। इस दौरान भारी संख्या में प्रेमी भक्तों ने गुरु महाराज के प्रवचन सुन आशीर्वाद प्राप्त किया।

लोग भौतिक पदार्थों में सुख ढूंढते हैं और सिर्फ इसके लिए ही करते हैं भाग दौड़

भक्तों ने गुरु महाराज के प्रवचन सुन आशीर्वाद प्राप्त किया।

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