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प्री-प्राइमरी स्कूल सिर्फ एक्टिविटी बेस्ड, पेरेंट्स पूछ रहे हमारे बच्चे को कब करेंगे लिखवाना शुरू

3 वर्ष पहले
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एजुकेशन रिपोर्टर | लुधियाना

14 नवंबर को महज 1000 रुपए के फंड में हर प्राइमरी स्कूल में 3-6 साल की उम्र के बच्चों के लिए शुरू किए गए प्री-प्राइमरी स्कूल अब भी पेरेंट्स की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। गवर्नमेंट स्कूलों में शुरू किए गए इन प्री-प्राइमरी स्कूलों को जहां एजुकेशन डिपार्टमेंट की ओर से टीचर्स को बिना किसी क्लियर करिकुलम के एक्टिविटी बेस्ड ही रखने की कोशिश की जा रही है। मगर एजुकेशन डिपार्टमेंट की ये पहल पेरेंट्स के गले के नीचे नहीं उतर रही है। एजुकेशन डिपार्टमेंट ने पहले 14 नवंबर को बिना किसी तैयारी के ये स्कूल लॉन्च कर दिए। पेरेंट्स में इसे लेकर भारी उत्साह देखने को मिला। इसके चलते हर स्कूल में करीब 100-120 स्टूडेंट्स की एडमिशन भी हुई हैं, लेकिन इन स्कूलों में पढ़ाने के लिए विभाग ने कुछ कविताएं और कुछ एक्टिविटीज की किट बना कर भेज दी है। इसकी ट्रेनिंग और सेमिनार भी मई महीने में अध्यापकों की दी जा रही है। जबकि नया सेशन पहली अप्रैल से शुरू हो चुका है। ऐसे में स्कूल हैड्स और टीचर्स परेशान हैं कि रोजाना इन बच्चों को क्या करवाया जाए। स्कूल हैड्स ने बताया कि पेरेंट्स रोजाना आकर उन्हें शिकायत करते हैं कि बच्चों को लिखना कब सिखाएंगे। ऐसे में उन्हें भी जवाब देना मुश्किल हो रहा है। डिपार्टमेंट की ओर से सिलेबस भी नहीं जारी किया गया है।

मिड-डे-मील अकाउंट में नहीं कर सकते शामिल

इन स्कूलों को शुरू करते समय डिपार्टमेंट ने एक हजार रुपए का फंड हर स्कूल को जारी करने के लिए कहा था। स्कूलों को ये फंड तो मिल चुका है, लेकिन स्कूलों पर होने वाले खर्चा इस फंड से कहीं ज्यादा है। जिसे स्कूल हेड्स ने अपनी जेब या फिर एनजीओ की मदद से किया है। प्राइमरी स्कूल टीचर ने कहा कि हर स्कूल में काफी बच्चे पढ़ रहे हैं। सिर्फ एक हजार के फंड से इन क्लासेस को चलाना मुश्किल है। वहीं, मिड डे मील देना या नहीं देना स्कूल हेड्स के हाथ में है, लेकिन उस खर्चे को स्कूल मुखी मिड-डे मील के अकाउंट में शामिल नहीं कर सकते। स्कूल हेड्स ने बताया कि हालांकि हम इन बच्चों को रोजाना खाना दे रहे हैं, लेकिन इसका खर्च किस अकाउंट में शामिल करें ये भी एक समस्या है।

अब तक सिर्फ एक हजार रुपए फंड ही जारी, उसके सहारे चल रहा प्री-प्राइमरी विंग

2.5 करोड़ का फंड जारी करने की चल रही तैयारी : डीपीआई एलिमेंट्री

इन स्कूलों को हमने सिर्फ एक्टिविटी बेस्ड ही बनाया है। सभी जिलों में प्री-प्राइमरी की एजुकेशन किट्स भी दी गई है। पेरेंट्स चाहते हैं कि बच्चा स्कूल में ज्यादा समय बिताए लेकिन ये संभव नहीं है। प्री-प्राइमरी क्लासेस के बच्चे आईसीडीएस स्कीम के तहत आते हैं। इसलिए इन्हें मिड डे मील प्रोजेक्ट में शामिल नहीं किया जा सकता। जहां तक फंड का सवाल है इस सेशन में सभी प्री-प्राइमरी स्कूलों के लिए शिक्षा विभाग द्वारा 2.5 करोड़ का फंड जारी करने की तैयारी चल रही है। इससे कई समस्याओं का हल हो जाएगा। -इंद्रजीत सिंह, डीपीआई, एलिमेंट्री

14 नवंबर को एजुकेशन डिपार्टमेंट ने सभी गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूलों में बिना तैयारी शुरू किए थे प्री-प्राइमरी स्कूल

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