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पहले दो साल तक जिन चीजों से दूर रहेगा बच्चा, उनसे होगी एलर्जी

3 वर्ष पहले
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बच्चों को जन्म से लेकर दो साल तक की उम्र तक जिन चीजों से दूर रखा जाता है, बाद में उन्हीं चीजों से बच्चे को एलर्जी होती है। यह दावा है दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के एलर्जी स्पेशलिस्ट (पीडियाट्रिक्स) डॉ. नीरज गुप्ता का। उन्होंने कहा कि गांव के बच्चे जन्म के बाद से ही मिट्टी में रहते हैं, इस कारण उन्हें कभी भी मिट्टी से एलर्जी नहीं होती। इसके विपरीत धूल-मिट्टी से दूर रहने वाले शहर के बच्चों को इन चीजों से एलर्जी रहती है।

पीडियाट्रिक्स इंटेंसिव केयर सोसाइटी (पिक्स) और एसपीएस हॉस्पिटल की ओर से पीडियाट्रिक्स ट्रीटमेंट रिसर्च पर आयोजित कंटीन्यइिंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) में विशेष गेस्ट के तौर पर पहुंचे डॉ. नीरज ने यह बात कही। बच्चों की किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकित मंगला ने बताया कि बच्चों में किडनी प्रॉब्लम से पेशाब में प्रोटीन आना, पत्थरी होना, शरीर में सूजन व बिस्तर गीला करने जैसी समस्याएं होती हैं। पेशाब में जलन होने और बार-बार बुखार होने से इनका पता चलता है। बच्चों के हार्ट डिजीज स्पेशलिस्ट डॉ. नवदीप सिंह ने बताया कि 100 में से एक बच्चा किसी न किसी तरह की दिल की बीमारी लेकर पैदा होता है। पंजाब मेडिकल कौंसिल (पीएमसी) के मेंबर डॉ. मनोज सोबती, पिक्स की प्रधान डॉ. पुनीत औलख पुन्नी, पीडियाट्रिक्स हेमेट-ओंकोलॉजिस्ट डॉ. प्रियंका गुप्ता, पीडियाट्रिक्स न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. गुरप्रीत सिंह कोचर, पीडियाट्रिक्स सर्जन डॉ. आरजे सिंह, नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. तानिया महल, डॉ. प्रदीप शर्मा, डॉ. विकास बंसल विशेष तौर पर हाजिर रहे। -(राजकुमार साथी)

पीडियाट्रिक्स इंटेंसिव केयर सोसाइटी (पिक्स) और एसपीएस हॉस्पिटल की ओर से पीडियाट्रिक्स ट्रीटमेंट रिसर्च पर सीएमई

एसपीएस हॉस्पिटल में सीएमई के दौरान जानकारी देते हुए माहिर डॉक्टर्स।

खतरनाक हैं आईबीडी रोग, लक्षणों की अनदेखी पड़ सकती है सेहत पर भारी

हेल्थ रिपोर्टर | लुधियाना

वर्ल्ड आईबीडी (इनलामेंटरी बाऊड डिजीज) डे को लेकर मरीजों और उनके रिश्तेदारों के लिए आयोजित इंट्रेक्टिव लेक्चर के दौरान एसपीएस हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग के मुखी और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. निर्मलजीत सिंह मल्ही ने कहा कि पर्यावरण और जैनेटिक प्रॉब्लम के कारण ये रोग हो सकते हैं। इनके लक्ष्णों की अनदेखी करना भारी पड़ सकता है।

हॉस्पिटल के काॅन्फ्रेंस हाल में आयोजित जागरुकता कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि पेट में ऐंठन, मल में खून आना और लगातार दस्त लगे रहना आईबीडी के लक्षण हैं। आईबीडी से पाचन तंत्र से जुड़ी अंतड़ियों में सूजन आने के कारण इस तरह की समस्याएं आती हैं, क्योंकि यह क्रोन डिजीज (सीडी) और अल्सरेटिव कोलाइटिस (यूसी) की श्रेणी में आता है। इसमें मरीज का वजन घटने लगता है। यह स्थिति सारी उम्र के लिए भी हो सकती है। इससे बचाव का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आईबीडी के लक्षण दिखते ही तुरंत अच्छे गैस्ट्रोलॉजिस्ट को दिखाएं। वहीं गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. अमित सोनी ने कहा कि इन बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक करने और उन्हें सही इलाज की जानकारी देने के लिए वर्ल्ड आईबीडी डे मनाया जाता है। इस मौके पर करीब 125 मरीज और उनके रिश्तेदार मौजूद रहे।

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