हर तीन साल में होता है एक अतिरिक्त पुरुषोत्तम मास
इस बार अधिक मास ज्येष्ठ में आ रहा 19 साल बाद
सिटी रिपोर्टर|लुधियाना
पुरुषोत्तम मास हर तीन साल में एक अतिरिक्त माह होता है। जिसे अधिक मास, मल मास या पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाता है। हिंदू धर्म में इस माह का विशेष महत्व है। इस मास में पूजा-पाठ, भगवद् भक्ति,व्रत-उपवास,जप और योग आदि धार्मिक कार्यों की बड़ी महत्ता है। इस मास में किए गए धार्मिक कार्यों का अन्य माह में किए पूजा-पाठ से 10 गुना अधिक फल मिलता है। हिंदू धर्म में अधिक मास के दौरान सभी पवित्र कार्य वर्जित माने गए हैं। माना जाता है कि अतिरिक्त होने के कारण यह मास मलिन होता है। इसलिए इस मास के दौरान हिंदू धर्म के विशिष्ट व्यक्तिगत संस्कार जैसे नामकरण,यज्ञोपवीत, विवाह, गृहप्रवेश आदि नहीं किए जाते हैं। मलिन मानने के कारण ही इस मास का नाम मल मास पड़ गया है। अधिक मास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु माने जाते हैं। पुरुषोत्तम भगवान विष्णु का एक नाम है। इसलिए अधिक मास को पुरुषोत्तम मास के नाम से पुकारा जाता है। भारतीय ज्योतिष सूर्य और चंद्र मास की गणना अनुसार चलता है। अधिक मास चंद्र वर्ष का एक अतिरिक्त भाग है, जो हर 32 माह, 16 दिन और 8 घड़ी के अंतर से आता है। इसका प्राकट्य सूर्य वर्ष और चंद्र वर्ष के बीच अंतर का संतुलन बनाने के लिए होता है। भारतीय गणना पद्धति के अनुसार प्रत्येक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है। वहीं चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। जो हर तीन वर्ष में लगभग 1 मास के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को खत्म करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अस्तित्व में आता है। पंडित दूली चंद शास्त्री ने बताया कि प्रत्येक 3 साल में 1 बार आने वाला भगवान विष्णु का प्रिय पुरुषोत्तम मास इस बार 16 मई से 13 जून तक रहेगा। शहर के मंदिरों में भागवत पारायण, लक्ष्मी नारायण यज्ञ सहित विभिन्न अनुष्ठान होंगे। इस बार अधिक मास ज्येष्ठ में 19 साल बाद आ रहा है। इससे पहले यह संयोग 1999 में बना था। ज्येष्ठ मास में यह दोबारा 2037 में बनेगा। अधिक मास में व्रत, दान, उपवास, पारायण आदि कार्य का अक्षय पुण्य मिलता है। इस वर्ष जुलाई से दिसंबर तक जो भी त्योहार होंगे। वह मौजूदा साल की तिथियों के मुकाबले 10 से 20 दिन तक की देरी से आएंगे। जुलाई से दिसंबर तक होने वाले त्योहार 10 से 19 दिन की देरी से आएंगे। स्थिति अधिक मास के कारण बनेगी।
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