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सिंगल टेंडर मंजूर तो टेंडरिंग वेबसाइट हुई एक्सपायर, मॉडर्न स्लॉटर हाउस लटका

3 वर्ष पहले
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केंद्र सरकार की स्कीम खत्म करने की चेतावनी पर सरकार ने मॉडर्न स्लॉटर हाउस के सिंगल टेंडर खोलने परमिशन दी तो ई-टेंडरिंग वाली वेबसाइट ही एक्सपायर हो गई। इससे मॉडर्न स्लॉटर हाउस का प्रोजेक्ट अधर में लटकने के आसार बन गए हैं। निगम को इसे कंप्लीट करने के लिए केंद्र ने मार्च 2019 की डेडलाइन दी है, लेकिन अब टेंडरिंग में ही काफी टाइम निकल जाएगा, ऐसे में ढाई साल से प्रोजेक्ट कामयाब बनाने में जुटे अफसर परेशान हैं। फिर भी प्रोजेक्ट बचाने को दोबारा टेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

बता दें कि जब सरकार ने सिंगल टेंडर खोलने की परमिशन दी तो निगम अफसर खुश हो गए। वो तीसरी बार के सिंगल टेंडर की टेक्निकल बिड खोल चुके थे, अब फाइनेंशियल बिड खोलनी बाकी थी। जब सरकार के फैसले के बाद उन्होंने पंजाब सरकार की ई-टेंडरिंग वेबसाइट खोली तो पता चला कि पिछले सारे टेंडर 31 मार्च को एक्सपायर हो चुके हैं, जिनमें माडर्न स्लॉटर हाउस का प्रोजेक्ट भी था।

टेंडरिंग प्रक्रिया में टाइम और राज्य सरकार-निगम के पास पैसे नहीं: मॉडर्न स्लॉटर हाउस के लटकने की सबसे बड़ी वजह अब फिर से टेंडरिंग प्रक्रिया में लगने वाला टाइम तो है ही, साथ ही इसके लिए बकाया साढ़े 11 करोड़ राज्य सरकार और निगम के हिस्से की है। दोनों के ही पास पैसों की कमी है और खासकर, निगम के पास तो सैलरी देने के लिए तक पैसे नहीं हैं। ऐसे में इस प्रोजेक्ट के मार्च 2019 तक पूरा होना तो दूर, अफसर शुरू कर कुछ हद तक बनाने के बारे में भी चिंता में पड़े हुए हैं।

केंद्र ने ब्याज समेत पैसा मांगा तो जागी थी सरकार

हंबड़ां रोड पर बना स्लॉटर हाउस अपग्रेड करने को साल 2008 में प्रोजेक्ट बना था, जिसकी कीमत 19.50 करोड़ थी। इसमें 8 करोड़ केंद्र सरकार ने देने थे, बाकी पैसा राज्य सरकार अौर निगम को देना था। पहले यह फंड न होने से लटका रहा। सितंबर 2017 में लोकल गवर्नमेंट मंत्री नवजोत सिद्धू ने दूसरे प्रोजेक्टों के साथ 20 करोड़ इस प्रोजेक्ट के लिए देने की घोषणा की तो अफसरों ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी। पहली बार में कोई टेंडर नहीं आया, दूसरी और तीसरी बार एक-एक टेंडर आया। पंजाब सरकार की शर्त थी कि सिंगल बिडर को टेंडर नहीं दे सकते, इसलिए मामला फंसा रहा। इसी दौरान केंद्र सरकार की फूड प्रोसेसिंग मिनिस्ट्री ने निगम को मार्च 2019 तक इसे पूरा करने का टारगेट दिया। ऐसा न करने पर ब्याज समेत ग्रांट का पैसा लौटा को कहा। निगम के पास ढाई साल पहले केंद्र की ग्रांट के 79 लाख रुपए आ चुके हैं।

अब फिर टेंडर लगा रहे हैं

वेबसाइट एक्सपायर होने की वजह से पिछला टेंडर नहीं खोल सके। अब फिर से टेंडर लगा रहे हैं। हमारी कोशिश है कि केंद्र की डेडलाइन के हिसाब से इसे पूरा किया जा सके। -डाॅ. वाईपी सिंह, सीनियर वेटरनरी अफसर, नगर निगम।

नगर निगम काे होने लगेगी अच्छी कमाई तो दूसरी ओर पब्लिक को मिलने लगेगा साफ-सुथरा मीट

अभी इस समय शहर में मुर्गे, बकरे और सुअर खुले में काटे और उनका मीट बेचा जाता है। नियमानुसार यह मीट खाने लायक नहीं होता है और इस संबंध में इस तरह के मीट की काेई जांच भी नहीं की जाती है। इसके साथ ही ऐसे मीट की बिक्री के लिए आसपास की जगह भी गंदगी भरी होती है। मॉडर्न स्लाटर हाउस बनता तो फिर दुकान पर जानवर काटने पर पाबंदी लग जाती। फिर जानवर यहीं काटे जाते, जिन्हें फ्रीजर में रखकर पैक कर बेचने के लिए भेजा जाना था। इसके लिए कोल्ड स्टोरेज वाली वैन भी होनी थी, जो मीट विक्रेताओं को इसकी डिलीवरी करती। माडर्न स्लॉटर हाउस पूरी तरह से ऑटोमेटिक होना था। यहां प्रति घंटा 2000 चिकन, 250 झटका और 250 हलाल तरीके से कटाई होनी थी। इससे निगम को अंदाजन हर महीने 10 लाख कमाई होनी थी।

माॅडल टाउन में मीट-मच्छी नष्ट कराई

लुिधयाना| निगम टीम ने सोमवार को माडल टाउन एरिया में गैरकानूनी तरीके से चल रही मीट-मच्छी की मंडी बंद कराई। इस मौके वहां लगभग 16 रेहड़ी मालिकों से घटिया किस्म की साढ़े 3 क्विंटल मीट-मच्छी नष्ट कराई गई। यह कार्रवाई निगम के जॉइंट कमिश्नर कुलप्रीत सिंह की अगुवाई में की गई। उन्होंने कहा कि निगम की वेटरनरी, सेहत, सेनिटेशन व तहबाजारी विंग की टीम के साथ मिलकर यह कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने रेहड़ी मालिकों को हिदायत की कि वो आगे से घटिया क्वालिटी की मीट-मच्छी न बेचें।

कार्रवाई करती नगर निगम की टीम।

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