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21 महकमों, 25 निगम अफसरों ने 327 करोड़ रुपए के टेंपरेरी एडवांस का नहीं दिया हिसाब

3 वर्ष पहले
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एक तरफ निगम के पास सैलरी देने को पैसे नहीं तो दूसरी तरफ टेंपरेरी एडवांस में दिए 327 करोड़ का हिसाब-किताब ही नहीं दिया गया है। ये आंकड़ा साल 2017 तक का है। इसका खुलासा भी लोकल गवर्नमेंट डिपार्टमेंट की ही ऑडिट ब्रांच की तरफ से ऑब्जेक्शन जता सीनियर अफसरों को भेजी रिपोर्ट से हुआ है। ये एडवांस निगम के 25 अफसरों और 21 अलग-अलग महकमों को निगम अकाउंट से दिया गया था। ऑडिट ब्रांच ने उनसे अकाउंट मिलान न कराने और इतनी बड़ी अमाउंट अनएडजेस्टेड होने की बात कह जिम्मेदार अफसरों की सैलरी और रिटायरमेंट पर एनओसी रोकने की सिफारिश की थी। वहीं, ट्रांसफर होने पर टेंपरेरी एडवांस की खाते से मिलान के बाद ही रिलीव करने को भी कहा था। इसके लिए सरकार के 8 जनवरी 1980, 8 दिसंबर 1985 व 3 अप्रैल 1986 के पत्रों का हवाला भी दिया था। ऑडिट ब्रांच ने इतनी बड़ी रकम का खातों से मिलान न करने पर फंड के दुरुपयोग की संभावना भी जताई थी। खास करके तब जब टेंपरेरी एडवांस देने का मकसद पूरा हो चुका हो लेकिन उसका हिसाब-किताब न दिया गया हो। ऑडिट ने कहा था कि संबंधित अफसरों व महकमों के आगे मामला उठा टेंपरेरी एडवांस की ऑडिट से तस्दीकशुदा स्टेटमेंट्स लेने को भी कहा था। कौंसिल ऑफ आरटीआई एक्टिविस्ट के प्रेजिडेंट रोहित सभ्रवाल ने कहा कि अगर यह पैसा सही से खर्च किया गया तो फिर संबंधित अफसरों व महकमों को तकलीफ क्यों है?

एक्सईन/एसडीओ लाइट 8.08 करोड़

एक्सईएन(स्टोर) 21.71 लाख

निगम टाउन प्लानर 1.27 करोड़

इंचार्ज वर्कशॉप 2.04 करोड़

जीएम(ट्रांसपोर्ट) 7.90 लाख

वॉटर सप्लाई सीवरेज अथॉरिटी 1.17 करोड़

एडीएफओ 8.93 लाख

हेल्थ अफसर 4.88 करोड़

कार्यसाधक अफसर 11 हजार

एसई(ओएंडएम) 2.10 करोड़

चुंगी सुपरिंटेंडेंट 52 हजार

कमिश्नर 6.14 लाख

असिस्टेंट कमिश्नर 4.05 लाख

मेयर 14,450 रुपए

सेक्रेटरी 4.42 लाख

बिल्डिंग सुपरिंटेंडेंट 1.71 लाख

लैंड अफसर 25,430 रुपए

लॉ अफसर 2960 रुपए

जिला योजना फंड 2.14 करोड़

पशु चिकित्सा अफसर 2319 रुपए

कर सुपरिंटेंडेंट 1.41 लाख

लैंड स्केप अफसर 19.54 लाख

आरटीआई सुपरिंटेंडेंट(हेडक्वार्टर): 1 हजार

एडिशनल कमिश्नर 6.49 लाख

टेंपरेरी एडवांस दिए जाने वालों में लोकल गवर्नमेंट,डीसी,सिविल सर्जन भी शामिल

लोकल गवर्नमेंट डिपार्टमेंट : 12.18 लाख

डिप्टी कमिश्नर : 40 हजार

सिविल सर्जन : 29,443 रुपए

सुपरिंटेंडेंट पुलिस : 4.37 लाख

नॉर्दर्न रेलवे : 8.11 लाख

पब्लिक वर्क्स : 14.80 करोड़

रीजनल सेटलमेंट कमिश्नर : 14,203 रुपए

एसडीओ दोराहा : 15 हजार

डीटीपी जालंधर : 22,975 रुपए

डीईटी जालंधर : 14,538 रुपए

स्टोर कंट्रोलर, पंजाब : 11,981 रुपए

खेतीबाड़ी कमिश्नर : 5 हजार

मेडिकल स्टोर करनाल : 1,022 रुपए

डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी : 32 रुपए

यूनिसेफ : 3.21 लाख

टेलीफोन महकमा : 40 हजार

इंप्रूवमेंट ट्रस्ट : 58.20 लाख

टीओ कम प्रोजेक्ट अफसर : साढ़े 8 हजार

डायरेक्टर रिमोट सेंसिंग सेंटर, पीएयू : 30 लाख

पंजाब मंडी बोर्ड : 25 लाख

पंजाब वॉटर सप्लाई एवं सीवरेज बोर्ड : 289 करोड़

टेंपरेरी एडवांस में मेयर-कमिश्नर के नाम भी

ये है प्रक्रिया

जब किसी काम के लिए टेंपरेरी एडवांस दिया जाता है तो उसके खर्च करने के बाद दूसरे महकमों को यूटीलाइजेशन सर्टिफिकेट निगम को भेजना होता है। वहीं, निगम के भीतर अफसरों को नोटिंग तैयार कर बिल जमा कराने होते हैं। जो अकाउंट ब्रांच के पास जाता है। अकाउंट से पास होने के बाद यह ऑडिट के लिए जाता है। मगर, इस मामले में कोई भी डिटेल्स ऑडिट ब्रांच के पास नहीं पहुंची।

चेक कराऊंगा रिकॉर्ड क्यों नहीं पहुंचा

ऑडिट ने ऑब्जेक्शन लगाया है तो मैं इसे चेक कराऊंगा कि ऑडिट ब्रांच तक जरूरी रिकॉर्ड या इन्फॉर्मेशन क्यों नहीं पहुंची। -जसकिरन सिंह, निगम कमिश्नर।

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