गर्भपात कराने के साथ ही बच्चे को अंधा बहरा बना सकता है रुबेला का वायरस
गर्भपात कराने के साथ ही बच्चे को अंधा बहरा बना सकता है रुबेला का वायरस
हेल्थ रिपोर्टर | लुधियाना
मीजल-रुबेला वैक्सीन को लाॅन् चकरने की तिथि भले आगे बढ़ा दी गई पर इसकी जानकारी के लिए लोग अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं, क्योंकि इस नई वैक्सीन को लेकर उनके मन में कई तरह के सवाल हैं। वे जानना चाह रहे हैं कि मीजल-रुबेला कैसे प्रभाव डालता है और नुकसान क्या हैं। कहीं इसका कोई साइड इफेक्ट तो नहीं है।
जिला टीकाकरण अधिकार डॉ. जसबीर सिंह ने बताया कि उनके पास हर रोज फोन आ रहे हैं। कुछ लोग तो खुद आकर जानकारी ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि मीजल (खसरा) छूत की बीमारी है। मरीज के खांसने या छींकने से भी यह फैलती है। रुबेला (हल्का खसरा) वायरल इंफेक्शन है। गर्भवती को इंफेक्शन होने पर गर्भपात हो सकता है। प्री-मेच्योर डिलीवरी हो सकती है। इंफेक्शन से पैदा होने वाला बच्चा अंधा, बहरा या हृदय रोगी हो सकता है। अगर बच्चे को हल्का बुखार, डायरिया या मामूली बीमारी हो तो भी उसे यह टीका लगवाया जा सकता है, लेकिन अगर बच्चे को तेज बुखार, कोई अन्य गंभीर बीमारी है या बच्चा हॉस्पिटल में एडमिट है तो उसकी बीमारी की हिस्ट्री को ध्यान में रखते हुए यह टीका नहीं लगवाना चाहिए, क्योंकि इससे एलर्जी होने का डर रहता है। सामान्य तौर पर इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है। अब तक 13 राज्यों के 7 करोड़ बच्चों को यह टीका लगाया जा चुका है। लुधियाना में साढ़े 12 लाख बच्चों को यह टीका लगना है। (राजकुमार साथी)
छूत की बीमारी है मीजल, एमआर वैक्सीन लगवाना है जरूरी
अगर किसी को तेज बुखार हो, शरीर पर लाल धब्बे बनने लगे हों, खांसी-जुकाम लगातार चला आ रहा हो, आंखों में लाली हो और उनमें से लगातार पानी बहता हो तो यह मीजल के लक्षण हो सकते हैं। इनमें से कोई भी लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
मीजल के लक्षण