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पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने लोकगीतों से सजाई महफ़िल

3 वर्ष पहले
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सुखद मुंडे, रोहित मजूमदार, नीलेश और चारु दत्त

manpreet.kaur1@dbcorp.in/लुधियाना| लुधियाना सांस्कृतिक समागम की तरफ से रविवार शाम को ए सिम्फनी ऑफ़ डिफरेंट काइंड और प्रख्यात लोक गायिका पदमश्री मालिनी अवस्थी की लाइव परफॉरमेंस का आयोजन किया गया। दुर्गा जसराज की तरफ से आयोजित करवाए गए इस कार्यक्रम के दौरान पहले चरण में ‘रागास ऑन तबला’ परफॉरमेंस पर भूप राग और मंत्र शक्ति पर हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। पदमश्री मालिनी अवस्थी ने ठुमरी से शुरुआत करते हुए ‘अरे नाजुक बैयां हूं, नाजुक बैयां क्यों मरोड़ी’ गाई। दादरा सुनाते हुए ‘तोड़ लाई राजा जमुनिया की डार मैं’। इसके बाद टप्पा ‘मियां नजरें नहीं आंदा वे, मुखड़ा दिखाके दिल ले जांदा’ गाया।उनके गीतों ने मौजूद श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया और एक के बाद एक सुनाए गए गीतों से अपनी आवाज का ऐसा जादू बिखेरा कि श्रोतागण देर रात तक जमा रहे। इस दौरान उनके हर गीत और हर अदा पर चर्चा हुई।

सौरभ

मेरे लिए गायकी सिर्फ एक विधा नहीं इबादत है : पद्मश्री मालिनी अवस्थी

मनप्रीत कौर। लुधियाना। पंजाब का संगीत बहुत समृद्ध है। मैं पंजाब के कई शहरों में गा चुकी हूं, लेकिन लुधियाना आने का सौभाग्य पहली बार मिला है। हालांकि पंजाब और बनारस की गायकी बहुत अलग है, लेकिन वहां भी टप्पा गाया जाता है। इस वजह से मैं जब भी पंजाब में परफॉर्म करने आती हूं तो टप्पा जरूर सुनाती हूं। यह कहना है प्रख्यात लोके गायिका पदमश्री मालिनी अवस्थी का। कार्यक्रम से पहले एक विशेष बातचीत में उन्होंने पंजाब और लोक गायकी से जुडी कई बातें सांझा की। मेरे लिए गायकी सिर्फ एक विधा नहीं है, बल्कि इबादत है। मैं इस परंपरा का हिस्सा हूं और मेरा दायित्व है संस्कृति को जैसे देखा वैसे उसकी खुशबू फैलाने का।

विनय

लुिधयाना, सोमवार 16 अप्रैल , 2018

जो दिल से गाते है उन कलाकारों को याद रखा जाता है : गाना बजाना दिमाग से भी होता है और दिल से भी दिमाग तय करता है कि आपको क्या गाना है, लेकिन जो दिल से गाते हैं उन्हीं कलाकारों को याद रखा जाता है।

ट्रेडिशन फोक कायम रखने की जिम्मेदारी युवा कलाकारों की है :

मुझे पंजाब का ठेठ पना, बोली खानपान, अपना मिजाज, खेती किसानी बहुत पसंद है। बस मैं चाहती हूं कि पंजाब का ट्रेडिशन फोक रिवाइव हो। थोड़ा कम हो गया है। फोक के लाजवाब आर्टिस्ट थे। पंजाब ट्रेंड सेटर है हर चीज में, लेकिन अब लोक गायक नहीं हो रहे। उनकी कमी है। गुरदास मान साहब एक मिसाल हैं । उनकी तरह और भी मेल फीमेल सिंगर्स को आगे आना चाहिए। इस तरफ एक जिम्मेदारी से सोचने की जरुरत है। पंजाब ही नहीं, बल्कि हर राज्य के कलाकारों को अपने ट्रेडिशन को लेकर जिमेदारी से आगे आना होगा। लोकगीत लोक को जोड़ने का काम करता है।

दुर्गा जसराज

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