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‘प्रेम केवल देना जानता है लेना नहीं’

3 वर्ष पहले
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सिद्धपीठ श्री दंडी स्वामी मंदिर में पुरुषोत्तम माह के उपलक्ष्य में श्रीराम चरित मानस कथा का शुभांरभ पंडित राज कुमार की अध्यक्षता में किया जा रहा है। कथा के दूसरे दिन विधिवत पूजन कर नरेश शर्मा ने कथा के परवाह को आगे बढ़ाते हुए आज श्रीराम के प्रति राजा निशात की भक्ति और उनके प्रेम के बारे में बताते हुए कहा कि प्रेम केवल देना जानता है लेना नही। जब तक प्रेम नहीं है तब तक केवल मांगना ही चलता रहता है। निशात ने जब श्रीराम का अयोध्या छोड़कर आने के बारे में सुना तो तो सेच लिया कि जो कुछ भी मेरा है वो श्रीराम के चरणों मंे अर्पित करना है। प्रेम का यही लक्षण है। जब श्रीराम से मिल तो श्रीराम ने उन्हंे सखआ कहकर संबोधित किया और अपने हृदय से लगा लिया। जिसे प्रभु अपने हृदय से लगा ले सारा संसार उसका आदर करता है। भगवान की सेवा जन्मों जन्मों की साधना से भी पराप्त नहीं होती। उन्होंने आगे कहा कि संसार से कभी कुछ ना मागो मांगना ही है तो प्रभु से मांगे। इस दौरान नरेश शर्मा ने अपने भजनों से श्रद्धालुओं को आनंदित किया। उन्होंने कहा कि मानस में तीन तरह के सखा है। एक विषयी सखा सुगरीव, राम जी के सन्मुख ले गए लक्ष्मण उन्हें। जाते ही कहने लगे कि नाथ क्रोध आने पर भी जिसका विवेक बना रहे, जिसे लोभ ना फंसा सके वो तो कोई आप जैसा ही हो सकता है। साधना करने से भी यह गुण नहीं आता यह तो कोई महापुरुष आप जैसे हो वही पा सकते हैं। आपकी कृपा कोई कोई ही पा सकते हैं। नरेश शर्मा ने कहा कि भक्ति का परिचय हर प्रेम पात्र में मिलेगा। संत दर्शन ही राम जी की कृपा के दर्शन हैं। प्रभु का स्वभाव जान लोंगे तो उनकी शरण मे जाने में जीव को संकोच नहीं होगा। प्रभु आरती कर कथा को विराम दिया गया।

सिद्धपीठ श्री दंडी स्वामी मंदिर में पुरुषोत्तम माह के उपलक्ष्य में श्रीराम चरित मानस कथा का शुभांरभ पर प्रभु के भजन गाते भक्त।

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