सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों को इस बार इनवायरमेंट डे प्लास्टिक पॉल्यूशन की थीम पर मनाने के लिए कहा है। 5 जून को साल विश्व भर में वर्ल्ड इनवायरमेंट डे मनाया जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए यूनाइटेड नेशन इनवायरमेंट द्वारा इस साल की थीम प्लास्टिक पॉल्यूशन घोषित की गई है। पर्यावरण संरक्षण के लिए हर साल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। सीबीएसई ने स्कूलों में स्टूडेंट्स को जागरूक करने के लिए विभिन्न तरह की एक्टिविटीज गठित करने के लिए कहा है। भविष्य को सुरक्षित करने के लिए अभी से ही कदम उठाने होंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए ये अवेयरनेस प्रोग्राम आयोजित किया जा रहा है।
इनोवेटिव आइडिया पर कंपीटिशन का भी हो सकता है आयोजन : स्कूल में विभिन्न तरह की गतिविधियों के लिए बोर्ड द्वारा सुझा भी दिए हैं। इसके लिए जहां प्लास्टिक का इस्तेमाल रोकने के लिए स्कूल को ही पहल करने के लिए आगे आना होगा। वहीं, स्टूडेंट्स खुद भी रोल मॉडल बन कर अन्य लोगों को प्लास्टिक का इस्तेमाल करने से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करेंगे। इसमें स्कूल प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट प्लान और स्कूल को प्लास्टिक मुक्त कैसे बनाएं जैसे विषय पर इनोवेटिव आइडिया कंपीटिशन, रोजाना प्लास्टिक प्रॉडक्ट को रिफ्यूज, रिड्यूस और रीयूज करने, स्कूल वेस्ट का ऑडिट करने और इस वेस्ट को कम करने के लिए विभिन्न तरीके अपनाना, स्कूल और स्कूल कैंटिन में प्लास्टिक बॉटल्स, रैपर, पैकेट, बैग, कप, प्लेट्स, टंबलर बैन करना, बायोडिग्रेडेबल प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करना, ईको-क्लब द्वारा आसपास के इलाके के लोगों को जागरूक करना जैसी एक्टिविटीज शामिल रहेंगी।
पंजाब में 2015-16 में 48073 टन प्लास्टिक वेस्ट हुआ उत्पन्न
सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) की 2015-16 की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में साल भर में 48,073 टन प्लास्टिक वेस्ट उत्पन्न हुआ है। वहीं, देश भर में 15,89,418 टन प्लास्टिक वेस्ट प्रोड्यूस हुआ। वहीं, राज्य भर में 208 प्लास्टिक यूनिट्स हैं। इसमें से 12 यूनिट्स मल्टीलेयर प्लास्टिक मैनुफैक्चरिंग यूनिट्स हैं। 2015-16 में पीपीसीबी द्वारा प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट रुल्स 2016 को न मानने पर सिर्फ 6 शो-कॉज नोटिस ही जारी किए गए। राज्य में 62 से भी ज्यादा अनरैगुलराइज्ड प्लास्टिक यूनिट्स भी चल रही हैं। वहीं, अगर प्लास्टिक के इस्तेमाल के प्रभाव के बारे में देखा जाए तो जमीन में प्लास्टिक के कैमिकल मिलने से जमीन भी प्रदूषित होती है। इससे मिट्टी की उर्वरता पर प्रभाव पड़ता है। वहीं, जानवरों के स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ने के साथ ही इंसानों को डर्माटाइटिस(स्किन में खुजली, जलन,दाने), आईसोर(आंखों की सूजन), हाइपोथाइरॉइडिज्म(अंडर एक्टिव थाइरॉइड) जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं।