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इंटरनेशनल मार्केट में डॉलर की कीमतों में लगातार वृद्धि बना एक्सपोर्ट का कारण

3 वर्ष पहले
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डालरों में कमाई को यार्न कारोबारियों ने शुरू किया एक्सपोर्ट, गारमेंट इंडस्ट्री पर ड्यूटी ड्रॉ बैक की दरों में कटौती के बाद यार्न के दामों में 25% वृद्धि से दोहरी मार

बिजनेस रिपोर्टर | लुधियाना

शहर से यार्न के एक्सपोर्ट ने गारमेंट इंडस्ट्री की मुश्किलों को बढ़ा दिया है। हालात ये हो गए हैं कि जहां पहले गारमेंट इंडस्ट्री ड्यूटी ड्रॉ बैक की दरों में कटौती के चलते एक्सपोर्ट में पिछड़ती जा रही थी, वहीं अब यार्न के एक्सपोर्ट ने उक्त इंडस्ट्री पर दोहरी मार मारनी शुरू शुरू कर दी है। यार्न के एक्सपोर्ट में एकाएक तेजी के पीछे इंटरनेशनल मार्केट में डॉलर की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि बड़ा कारण बन गई है। शहर में 55 के करीब बड़ी यार्न इंडस्ट्री को मिला 200 के करीब छोटी-बड़ी यार्न इंडस्ट्री हैं।

अब डॉलर में हो रही बढ़ोतरी के चलते यार्न इंडस्ट्री मालिक गारमेंट इंडस्ट्री को यार्न बेचने की बजाए बंगलादेश, इथोपिया व वियतनाम जैसे देशों में यार्न एक्सपोर्ट कर रहे हैं। इसका नतीजा है कि घरेलू इंडस्ट्री में कॉटन यार्न का रेट 200 रुपए से बढ़कर 250 रुपए प्रति किलो पहुंच गया है और पॉलिस्टर यार्न का रेट भी 100 रुपए से बढ़कर 140 रुपए प्रति किलो के आसपास पहुंच गया है। ये पहली बार है कि यार्न के रेटों में 20 से 25 फीसदी का उछाल एकाएक आ गया है।

शहर में 200 छोटी और बड़ी यार्न इंडस्ट्री, एक्सपोर्ट की ओर रुझान बढ़ने से देश में कॉटन यार्न 50 रुपए और पॉलिएस्टर यार्न 40 रुपए प्रति किलो महंगा

यार्न एक्सपोर्ट गारमेंट इंडस्ट्री के लिए खतरे की घंटी

बंगलादेश, श्रीलंका, इथोपिया, वियतनाम सहित कई अन्य विकासशील देश जहां यार्न का एक्सपोर्ट एकाएक बढ़ने के पीछे वहां की गारमेंट इंडस्ट्री है। इन देशों की ओर से यार ्न से तैयार होने वाले गारमेंट को बडे़ देशों में एक्सपोर्ट करना शुरू कर दिया है। भारत की गारमेंट इंडस्ट्री की ओर से बाहर एक्सपोर्ट किए जाने वाले गारमेंट में 17 फीसदी एक्साइज ड्यूटी अदा करनी पड़ती है, जबकि इन छोटे देशों को एक्सपोर्ट करने में बडे़ देशों की ओर से रियायत दी गई है और इनसे किसी तरह की एक्साइज ड्यूटी नहीं वसूली जाती। यही कारण है कि जहां एक ओर डोमेस्टिक मार्केट में यार्न महंगा हो गया है, वहीं दूसरी ओर छोटे देशों से हो रहे एक्सपोर्ट के मुकाबले भारतीय गारमेंट महंगा पड़ रहा है।

बाजार से सपोर्ट नहीं

यार्न इंडस्ट्री की पहली पसंद लोकल मार्केट ही रहती है, लेकिन अगर बाजार से सपोर्ट न मिले तो दूसरी मार्केट को देखना पड़ता है। अभी डॉलर के रेट तेज हैं और अधिक फर्क आने पर कई बार ऐसा हो जाता है। ऐसा नहीं की सभी यार्न इंडस्ट्री एक्सपोर्ट ही कर रही हैं। -मदन मोहन व्यास, प्रेसिडेंट, पंजाब स्पिनर्स एसोसिएशन

गारमेंट इंडस्ट्री हो जाएगी बंद

अगर यार्न एक्सपोर्ट किया जाएगा तो यहां की गारमेंट इंडस्ट्री बंद हो जाएगी। अगर हमें सस्ते रेट पर यार्न बेचा जाता है और इसका एक्सपोर्ट बंद किया जाता है तो हम अधिक डॉलर कमा कर देश में ला सकते हैं। केंद्र को चाहिए कि ये एक्सपोर्ट बंद हो ताकि हम अपनी इंडस्ट्री चला सकें। इस मामले में गारमेंट इंडस्ट्री मिलकर केंद्रीय सरकार से भी मुलाकात करेगी। -हरीश दुआ, प्रेसिडेंट निटवियर एंड अपैरल एक्सपोर्ट संघ

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