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ईश्वर को अंत:करण में देखना ही है वास्तविक धर्म: दिवेशा

3 वर्ष पहले
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गोविंदगढ़ में पांच दिवसीय शिव कथा का दूसरा दिन

सिटी रिपोर्टर | लुधियाना

दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा गोविंदगढ़ में पांच दिवसीय शिव कथा करवाई जा रही है। कथा के दूसरे दिन बलबीर सिंह कुलार बिल्डर्स, राजेश यादव, लाला मनन लाल द्वारा ज्योति प्रचंड की। कथा में आशुतोष महाराज कि शिष्या कथा व्यास मानस मर्मज्ञ साध्वी दिवेशा भारती ने कहा कि भगवान शिव ने जन कल्याण के लिए विष पान किया। अमृत देवताओं को देकर संदेश दिया कि यदि आप महान बनना चाहते हो तो त्याग करना होगा। आज शिव जैसे नेता के अभाव में समाज पतन के कागार पर खड़ा है। मानव सत्य,न्याय,धर्म को भूल कर अधर्म,पाप के राह पर बढ़ रहा है।धार्मिक शास्त्रों अनुसार धर्म एक है जो आदि काल से चला आ रहा है। वह कहीं बाहर नहीं अपितु हमारे भीतर है। ईश्वर को अंत:करण में देखना ही वास्तविक धर्म है। धर्म का अर्थ मूल परमात्मा से जुडऩा है। हमें मूल ईश्वर से जुड़ने और धर्म स्वरूप को जानने के लिए पूर्ण गुरु की जरूरत है। जब जीवन में पूर्ण गुरु का आगमन होगा तो वो हमें ब्रह्मज्ञान प्रदान करेंगे। इससे हम ईश्वर का दर्शन कर वास्तविक धर्म से अवगत हो पाएंगे। भक्तों ने शिव कथामृत सुन जीवन कृतार्थ किया। इस अवसर पर हरि किशोर, जय किशोर, उपिंदर पांडे, काला, कमलेश्वर, भाटिया, सुभाष, जीत सिंह सहित भारी संख्या में भक्त उपस्थित रहे। प्रभु की आरती कर कथा को विराम दिया गया।

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