टिब्बा रोड की मोती बाग कॉलोनी निवासी 59 साल के इंदरजीत भाटिया की बाईपास सर्जरी के एक दिन बाद मौत हो गई। इससे गुस्साए घरवालों ने हॉस्पिटल के डॉक्टर पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगा धरना-प्रदर्शन किया। उधर, हॉस्पिटल प्रबंधन ने इलाज में किसी लापरवाही से इनकार किया है।
इंदरजीत भाटिया के बेटे विजय कुमार और रिश्तेदार सुनैना ने बताया कि 16 मई को उन्हें हार्ट प्रॉब्लम के साथ नहर किनारे मौजूद पंचम अस्पताल में भर्ती कराया था। 17 मई को उनकी बाईपास सर्जरी की गई। 18 मई की रात अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। तब कोई स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं था। स्टाफ नर्सों, एक जूनियर डॉक्टर ने उन्हें बाहर निकाल दिया और इंद्रजीत की छाती दबाने लगे। रात साढ़े 10 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। अगर मौके पर कोई स्पेशलिस्ट डॉक्टर होता तो उनको बचाया जा सकता था। उधर, हॉस्पिटल के डायरेक्टर हरमनप्रीत सिंह ने कहा कि मरीज जब उनके पास आया तो उसे हार्ट के साथ ही किडनी की प्रॉब्लम भी थी। सर्जरी के रिस्क के बारे में मरीज को रिश्तेदारों को बता दिया था। सर्जरी तो ठीक हो गई, लेकिन अगले दिन कांप्लिकेशंस हो गईं। मौके पर सीनियर डॉक्टर मौजूद थे। इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई।
मरीज की मौत से गुस्साए घरवाले हॉस्पिटल के बाहर प्रदर्शन करते हुए।