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जमांबदी में दर्ज होंगे नाड़-पराली जलाने वाले किसानों के नाम, नहीं मिलेगा स्कीमों का लाभ

3 वर्ष पहले
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10 अप्रैल से 19 मई तक जिले में 703 और सूबे में अब तक 10739 खेतों में लगाई गई आग

सिटी रिपोर्टर | लुधियाना

जिले में इस समय 10 अप्रैल से 19 मई तक 703 खेतों में नाड़ जलाने की घटनाएं पंजाब रिमोर्ट सेसिंग सेंटर के द्वारा कैप्चर की जा चुकी हैं। वहीं, सूबे की बात करें तो अब तक 10 हजार 739 घटनाएं सामने आई हैं, जिससे सूबे में प्रदूषण का लेवल भी बढ़ चुका है। वहीं, हर साल सरकार किसानों को जागरूक करने के लिए सालाना करोड़ रुपए खर्च कर रही है कि खेतों में किसान नाड़ और पराली को न जलाएं, इससे प्रदूषण बढ़ रहा है और पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है, लेकिन कुछ किसान खेतों में नाड़ और पराली जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं।

पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा इन किसानों के चालान तो काटे जा रहे हैं, वहीं जिला प्रशासन भी अंदरखाते ऐसे किसानों सबक सिखाने के लिए जमाबंदी में नाम दर्ज करने में लगा है। जमाबंदी में नाम दर्ज होेने पर ऐसे किसानों को किसी भी प्रकार की सरकारी स्कीम का लाभ नहीं मिल पाएगा और उन किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जैसे किसी आपदा के समय मुआवजा या अन्य किसी प्रकार की किसानों के लिए शुरू हो चुकी या शुरू होने वाली स्कीमों में कोई फायदा नहीं मिलेगा। सूत्रों से यह भी पता चला है कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी अंदर खाते नाड़ और पराली जलाने वालों किसानों पर सख्ती करने के लिए पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को आदेश दे दिए हैं।

जिला प्रशासन ने अंदरखाते शुरू की नाड़-पराली जलाने वाले किसानों की पहचान

ऐसे मिल जाएगी किसान की जानकारी

हर इलाके से संबंधित तहसील में उस इलाके की पूरी जमीन का ब्याैरा होता है। अगर किसी भी इलाके में किसान ने नाड़ या खेत जलाया है तो उसकी जानकारी तहसील में मौजूदा जमाबंदी में संंबंधित खेत के कागाजातों में दर्ज कर दी जाएगी। इसके बाद अगर उस किसान द्वारा किसी आपदा या अन्य किसी भी प्रकार की सरकारी स्कीम का लाभ लेना होगा तो उसके रिकार्ड में खेतों में आग लगाए जाने का पता चल जाएगा। इससे उस किसान को ऐसी सुविधाएं लेने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

खेतों के मालिकों के नाम पता करके दर्ज होंगे जमाबंदी में

जो किसान नाड़ को जला रहे हैं, उन खेतों के मालिकों का नाम पता करवाकर नाम जमाबंदी में दर्ज किया जाएगा। इससे उस किसान को किसी भी प्रकार की सरकारी स्कीमों के तहत लाभ लेने में परेशानी आएगी। इसके अलावा उन किसानों को जुर्माने भी किए जा रहे हैं। -प्रदीप अग्रवाल, डिप्टी कमिश्नर।

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