पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • लांग टर्म में म्यूचुअल फंड से बेहतर कोई निवेश नहीं

लांग टर्म में म्यूचुअल फंड से बेहतर कोई निवेश नहीं

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
दुनिया की इकोनॉमी और राजनीति में हाल के दिनों में कई बदलाव देखने को मिले हैं। बल्कि यह कहा जाना चाहिए कि इनमें हमेशा बदलाव होते रहते हैं। किसी भी वक्त हमारा ध्यान पुरानी खबरों पर कम, सामयिक खबरों पर ज्यादा होता है। आज का वर्तमान कल अतीत हो जाएगा और कल का भविष्य हमारा वर्तमान होगा। हमारा वर्तमान बेहतर हो, इसलिए भविष्य को ध्यान में रखना जरूरी है। आबादी में कम उम्र के लोगों का औसत ज्यादा होने के फायदे के बारे में बहुत कुछ कहा गया है। हमारी आबादी का बड़ा हिस्सा 18 से 60 साल के कामकाजी लोगों का है। दूसरे बड़े देशों में 60 साल से ज्यादा वालों का अनुपात अधिक है। यह सही है कि हमें अपने लोगों के लिए बड़ी संख्या में नौकरियों और बिजनेस ऑपरचुनिटी की जरूरत है, फिर भी यह साफ है कि बुजुर्ग आबादी की तुलना में युवा आबादी वाला देश हमेशा बेहतर स्थिति में होता है। परिवार में कमाने वालों की संख्या ज्यादा होने का मतलब है कि गैर-कामकाजी लोगों का बोझ कम होगा।

आबादी के अनुपात में फंड निवेशक बहुत कम: भविष्य बेहतर बनाने के लिए हमें बचत और निवेश करने की जरूरत है, ताकि जब हमारी कोई आमदनी नहीं होगी तब ये काम आ सकें। म्यूचुअल फंड भविष्य सुरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण जरिया है। भारत में म्यूचुअल फंड की शुरूआत करीब आधी सदी पहले हुई थी। निजी क्षेत्र को 1993 में इसमें प्रवेश की इजाजत मिली, और तब से यह सेगमेंट तेजी से फैल रहा है। फिर भी आबादी के अनुपात में म्यूचुअल फंडों में निवेश करने वाले बहुत कम हैं। देश की कुल आबादी 134 करोड़ है। इनमें से 75 करोड़ के पास बैंक अकाउंट और 35 करोड़ के पास बीमा है। पैन कार्डधारक 29 करोड़ और म्यूचुअल फंड अकाउंट वाले सिर्फ 6.6 करोड़ हैं।

जब जरूरत, तब निकाल सकते हैं पैसे: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। उम्मीद है कि ज्यादा लोग इसके फायदे को समझेंगे और निवेश करेंगे। इसके कुछ फायदे हैं- इसमें आप 500 रुपए (कुछ फंडों में 1,000 रुपए) की छोटी रकम से भी निवेश की शुरूआत कर सकते हैं। जरूरत के समय कभी भी पैसे निकालने का विकल्प होता है। आपको एक दिन (लिक्विड फंड) से तीन दिन (इक्विटी फंड) के भीतर पैसे मिल जाएंगे। इसमें निवेश की लागत कम होती है और सर्विस स्टैंडर्ड ऊंचा होता है।

मौजूदा माहौल में बैलेंस्ड फंड में निवेश बेहतर: रिटर्न के लिहाज से देखें तो लांग टर्म में म्यूचुअल फंड से बेहतर और कोई इन्वेस्टमेंट नहीं है। भारतीय इक्विटी मार्केट अभी ऊपरी स्तर पर हैं, लेकिन यह साफ नहीं है कि इनकी वैल्यू उचित स्तर से अधिक है या नहीं। ऐसे में बैलेंस्ड फंड में निवेश करना ठीक रहेगा। बैलेंस्ड फंड में डेट और इक्विटी, दोनों में निवेश किया जाता है। - ये लेखक के निजी विचार हैं। इनके आधार पर निवेश से नुकसान के लिए दैनिक भास्कर जिम्मेदार नहीं होगा।

म्यूचुअल फंड

वकार नकवी

सीईओ, टॉरस एसेट मैनेजमेंट

खबरें और भी हैं...