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खेरखेड़ा श्रीरामपुरा के जंगलों में चल रही अवैध कटाई, जगह-जगह दिख रहे पेड़ों के ठूंठ
भास्कर संवाददाता| मधुसूदनगढ़
मधुसूदनगढ़ उकावद क्षेत्र का हरा- भरा सागवान का जंगल रेंज कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते मैदानों में परिवर्तित होता जा रहा है। यह सब कारनामा रेंज विभाग की मिलीभगत के चलते हो रहा है। रोजाना एक दर्जन से अधिक गाड़ियां खेरखेड़ा श्रीरामपुरा के जंगलों अवैध कटाई कर लकड़ियों से भरवाए जा रहे हैं। अगर क्षेत्र के जंगलों का सर्वे किया जाए तो काटे गए पेड़ों के ठूंठ व कटे हुए पेड़ अवैध कटाई की कहानी खुद ही बयां कर देंगे। अवैध कटाई का कार्य क्षेत्र में तेजी से चल रहा है और अधिकारियों की नींद नहीं खुल रही है। क्षेत्र में जब भी सागवान की सिल्लियों का महकमा पकड़ता है तो तस्कर अक्सर भाग जाते हैं और सिर्फ लकड़ी और वाहन जब्त किया जाता है।
यह सब खेरखेड़ा, अकावद के जंगल मैदानों में परिवर्तित होता जा रहा है अगर समय रहते इस की अवैध कटाई नहीं रुकी तो वाली पीढ़ी सागवान नाम को देखने को तरस जाएगी। वहीं विभाग के रेंज कर्मचारी जंगल की रखवाली न करते हुए अवैध रूप से जंगल को कटवाने में मशगूल हैं। लोगों का कहना है कि इसकी उच्च स्तरीय जांच की जाना आवश्यक है।
जिला मुख्यालय से 95 किमी दूर है खेरखेड़ी का जंगल, दूर होने के कारण अधिकारी नहीं देते ध्यान
अवैध रूप से चल रही आरा मशीन
मधुसूदनगढ़ में भी अवैध रूप से छोटी आरा मशीनें वन विभाग की मिलीभगत से संचालित की जा रही है। सागवान की लकड़ी का फर्नीचर बनाकर खुलेआम बेचा जा रहा है यह सब भी रेंज विभाग के मिलीभगत से चल रहा है। अवैध कटाई की उच्च अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच कर जंगल कटवाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाना चाहिए। वहीं जंगल में घूम कर भौतिक सत्यापन किया जाना बहुत ही आवश्यक है। यहां से हजारों सागवान के पेड़ काटे गए हैं।
खेरखेड़ी के जंगलों में काटे गए पेड़।
अिधकारी दौरे के नाम जंगल में न जाकर सड़क से ही घूमकर आ जाते हैं
जिला मुख्यालय से क्षेत्र 95 किमी दूर होने के कारण जिले के उच्च अधिकारी जंगल की ओर ध्यान नहीं दे हैं, जब भी दौरे पर आते हैं तो मात्र सड़क किनारे घूम कर चले जाते हैं जंगल में अंदर जाकर नहीं देखते हैं कि किस तरह से अवैध हरे भरे जंगलों की कटाई की जा रही है। यह सब स्थानीय रेंज कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रहा है। खेरखेड़ा बीड का बारीकी से घूमकर जंगल का सर्वे किया जाए कि पिछले 1 वर्ष में अंधाधुंध अवैध कटाई के कई सबूत मिल सकते हैं। भास्कर ने क्षेत्र में जाकर पड़ताल की तो कई स्थानों पर कटे हुए पेड़ों की ठूंठ व कटे हुए पेड़ दिखाई दिए।