मृदा परीक्षण से भूमि में उपलब्ध पोषक तत्वों की मात्रा की जानकारी मिलती है। इस परीक्षण का उद्देश्य भूमि की उर्वरता मापना तथा यह पता लगाना है कि भूमि में कौन से तत्व की कमी या अधिकता है। यह बात ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी विजयकांत साहू ने ग्राम करेली बड़ी के खेतों में मृदा परीक्षण के दौरान किसानों से कही।
इन दिनों खेतों में मृदा परीक्षण का कार्य चल रहा है। इसके तहत सिंचित भूमि में 2.5 हेक्टेयर और असिंचित भूमि में 10 हेक्टेयर क्षेत्र की मिट्टी की सैंपल लेकर ग्रिड बनाए जा रहे हैं। प्रत्येक ग्रिड के सैंपल को जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। इस आधार पर किसानों के खेतों के स्वाइल हेल्थ कार्ड में लिखा जाएगा कि किस रासायनिक तत्व की कमी या अधिकता है। इस रिपोर्ट के आधार पर पैदावार बढ़ाने किसान अपने खेतों में पोषक तत्वों का उपयोग करेंगे।
मगरलोड। मृदा परीक्षण के लिए खेत से मिट्टी एकत्र करते कृषक।
अधिक पैदावार लेने मृदा परीक्षण जरूरी
ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी विजयकांत साहू ने बताया कि पौधों को अपना जीवन चक्र पूरा करने के लिए 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। ये तत्व कार्बन, हाइड्रोजन, आक्सीजन, नाइट्रोजन फास्फोरस, पोटाश, कैल्सियम, मैग्नीशियम, जिंक, मैंग्नीज, तांबा, आयरन, बोरान, मोलिब्डेनम, क्लोरिन हैं। इन सभी तत्वों का संतुलित मात्रा में प्रयोग करने से ही उपयुक्त पैदावार ली जा सकती है।