मगरलोड| रबी फसल कटते ही किसान खरीफ फसल की तैयारी के लिए खेतों में पड़े नरई पैरा को जला देते हैं, जबकि इस पर प्रतिबंध लगा हुआ है। ऐसे में किसानों को खेतों में नरई पैरा जलाने से रोकने के लिए कृषि विभाग ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। एसडीओ कृषि केएस नरेटी ने बताया कि खेतों में पैरा नरई जलाने से भूमिगत कृषि मित्र कीट तथा सूक्ष्म जीव मर जाते हैं। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति भी कम हो जाती है और फसलों में तरह-तरह की बीमारियां होने लगती है। मानव स्वास्थ्य के लिहाज से भी नरई पैरा का धुआं अत्यंत हानिकारक है। इससे वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड और मिथेन गैसों की मात्रा बढ़ जाती है। इन स्थितियों से बचने के लिए नरई पैरा को जलाने के बजाय खेत में पानी डाल कर अच्छी से जुताई कर खाद बनाना चाहिए। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है। ऐसी खाद बनाने के लिए किसानों को कृषि विभाग द्वारा प्रति एकड़ 1 हजार रूपए दिए जाएंगे।